न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: पश्चिमी चंपारण जिला में रामनगर थाना क्षेत्र के बैकुंठपुर गांव (वार्ड-15) में बीती रात उस वक्त मातम पसर गया, जब शॉर्ट सर्किट की एक चिंगारी ने भीषण अग्निकांड का रूप ले लिया। रात करीब 11 बजे जब ग्रामीण गहरी नींद में थे, तभी अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटों ने चार घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह घटना में गरीबों का बरसों का आशियाना उनकी आंखों के सामने राख हो गया। सबसे दुखद बात यह रही कि घरों में बंधे आधा दर्जन बेजुबान मवेशी खुद को बचाने में नाकाम रहे और जिंदा जल गए।
दमकल की विफलता और ग्रामीणों का 'ऑपरेशन सुरक्षा'
घटना की सूचना मिलते ही रामनगर से अग्निशमन की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि वह बेअसर साबित हुई। बाद में भैरोगंज से दूसरी दमकल टीम बुलानी पड़ी। इस बीच, पूरे मोहल्ले को बचाने के लिए ग्रामीणों ने जो साहस दिखाया, उसने बड़ी तबाही को रोक लिया। युवाओं ने फसल में कीटनाशक छिड़कने वाली मशीनों को पानी से भरकर स्प्रे करना शुरू किया। लोगों ने बाल्टी-लोटों और चापाकल के सहारे घंटों मशक्कत की। आग की चेन तोड़ने के लिए ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए एक फूस के घर को खुद ही गिरा दिया, ताकि लपटें आगे न बढ़ें।
दाने-दाने को मोहताज हुए पीड़ित परिवार
इस भीषण अग्निकांड में पीड़ितों के पास अब बदन के कपड़ों के सिवा कुछ नहीं बचा है। घर में रखा साल भर का अनाज, बर्तन, नकदी और जरूरी कागजात सब जलकर कोयला हो चुके हैं। लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान होने का अनुमान है। बेजुबान मवेशियों की मौत ने परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है।
प्रशासन से मुआवजे की गुहार
हादसे के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बेघर हुए इन परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, तिरपाल और सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।