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रांची/डेस्क: भारत-नेपाल सीमा पर रोजमर्रा की खरीदारी और छोटे व्यापार से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई हैं. नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार के उस विवादित फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रूपए से अधिक मूल्य के सामान पर भी कस्टम ड्यूटी वसूली का प्रावधान किया गया था.
सीमा पर बढ़ी थी आम लोगों की परेशानी
सरकार के इस नियम के लागू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा चौकियों पर हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे. दैनिक उपयोग की छोटी वस्तुएं जैसे चिप्स, बिस्किट, फल और अन्य सामान्य सामान पर भी कस्टम विभाग की सख्ती बढ़ गई थी. 100 रुपये की सीमा तय होने के कारण सीमा पार आने-जाने वाले आम नागरिकों को बार-बार जांच और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा था, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी.
अधिवक्ताओं ने दायर की याचिका
इस विवादित फैसले के खिलाफ अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और बिक्रम शाह ने नेपाल की सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी. याचिका में इस नियम को आम जनता के लिए असुविधाजनक और अनुचित बताया गया था. मामले की सुनवाई करते हुए नेपाल की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अदालत ने स्पष्ट कहा कि अर्थ मंत्रालय और कस्टम विभाग द्वारा दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर इस तरह की सख्ती उचित नहीं हैं.
कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक सीमा पर आम लोगों से दैनिक उपयोग के सामान पर कोई टैक्स वसूला नहीं जाएगा. साथ ही, सीमा पर स्थिति को पूर्ववत सामान्य रखने के निर्देश दिए गए हैं.
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