छत्तीसगढ़ में माओवादियों को बड़ा झटका, 8 लाख के इनामी कमांडर का सरेंडर

छत्तीसगढ़ में माओवादियों को बड़ा झटका, 8 लाख के इनामी कमांडर का सरेंडर

छत्तीसगढ़ में माओवादियों को बड़ा झटका 8 लाख के इनामी कमांडर का सरेंडर 

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली हैं. उत्तरी बस्तर के कांकेर जिले में 8 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया हैं. सरेंडर करने वाले उग्रवादी की पहचान दारसु शोरी के रूप में हुई है, जो लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय था.

AK-47 और संचार उपकरणों के साथ किया सरेंडर
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दारसु शोरी ने आत्मसमर्पण के दौरान एक AK-47 असॉल्ट राइफल, गोला-बारूद से जुड़े सामान और कुछ इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण भी सुरक्षा बलों को सौंपे हैं. यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम मानी जा रही हैं. जानकारी के अनुसार, दारसु शोरी पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की कंपनी नंबर 5 में सक्रिय सदस्य था. वह उत्तरी बस्तर डिवीजन कमेटी के तहत काम कर रहा था और संगठन के कई अभियानों में उसकी भूमिका बताई जा रही हैं. 

संगठन में निभाता था अहम जिम्मेदारियां
पुलिस ने बताया कि दारसु शोरी PPCM स्तर का सदस्य था. ऐसे सदस्य संगठन के भीतर रणनीतिक और संचालन संबंधी जिम्मेदारियां निभाते हैं. वह लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने, लैंडमाइन बिछाने, हथियारों की आवाजाही और सेक्शन कमांडर स्तर की जिम्मेदारियों में शामिल रहा हैं. आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियां दारसु शोरी से पूछताछ कर रही हैं. अधिकारियों का मानना है कि उससे मिली जानकारी के आधार पर इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों और उनके नेटवर्क तक पहुंच बनाई जा सकेगी. इससे आने वाले समय में नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूती मिल सकती हैं. 

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राकेचा ने कहा कि दारसु शोरी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है, जो स्वागत योग्य कदम हैं. प्रशासन ऐसे लोगों को पुनर्वास योजनाओं के जरिए नया जीवन देने के लिए तैयार हैं. बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने इस आत्मसमर्पण को सकारात्मक संकेत बताया. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई माओवादी कैडर हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की दिशा में आगे आए हैं. यह बताता है कि अब संगठन के भीतर भी भरोसा कमजोर पड़ रहा हैं. 

आईजी ने अन्य सक्रिय माओवादियों से भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग समाज में वापस लौटना चाहते है, उनके लिए सरकार की पुनर्वास नीति के दरवाजे खुले हैं. सुरक्षा बलों ने साफ संदेश दिया है कि जो माओवादी हिंसा और हमलों का रास्ता नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. बस्तर क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क को खत्म करने के लिए अभियान लगातार तेज किया जा रहा हैं. 

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