न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार सरकार ने सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली किराये की डीजल और पेट्रोल गाड़ियों को धीरे-धीरे हटाने का फैसला लिया है। उनकी जगह अब इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन खर्च में कमी आएगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को दी गई है। दोनों एजेंसियां वाहन कंपनियों से तालमेल कर अलग-अलग विभागों को जरूरत के हिसाब से इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराएंगी। शुरुआत में करीब दो से तीन हजार EV सड़क पर उतारने की तैयारी की जा रही है।
हाईलाइट्स -
- बिहार सरकार सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहन लागू करेगी
- पहले चरण में 2-3 हजार EV उपलब्ध कराने की तैयारी
- सरकारी परिसरों और पेट्रोल पंपों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशन
बड़ी कंपनियों के साथ बनी नई रणनीति
इस योजना को लेकर शुक्रवार को विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। बैठक में परिवहन विभाग के अधिकारी, पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधि और कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां शामिल हुईं। टाटा मोटर्स, एमजी मोटर, हुंडई, मारुति सुजुकी और टीवीएस जैसी कंपनियों के साथ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य को लेकर चर्चा की। सरकार ने कंपनियों से कहा कि वे ऐसे मजबूत EV मॉडल तैयार करें जो बोलेरो, स्कॉर्पियो-एन और आर्टिगा जैसी गाड़ियों की तरह लंबी दूरी तय कर सकें और सरकारी उपयोग के लिहाज से भरोसेमंद हों।
चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने पर भी फोकस
सरकार सिर्फ गाड़ियां खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। बैठक में फैसला लिया गया कि सरकारी परिसरों और सार्वजनिक जगहों पर बड़े स्तर पर EV चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। इसके अलावा पेट्रोलियम कंपनियों को अपने पेट्रोल पंपों पर भी अनिवार्य रूप से EV चार्जर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल आसान और सुविधाजनक बनाया जा सके।
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