न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: झारखंड उच्च न्यायालय ने डुअल डिग्री (Dual Degree) मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक ही सत्र में स्नातकोत्तर (Post Graduation) एवं बी.एड. की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है. माननीय उच्च न्यायालय ने W.P.(S) No. 4210 of 2024, W.P.(S) No. 553 of 2025 एवं अन्य समरूप मामलों में सुनवाई करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इन मामलों में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम, चंचल जैन एवं अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा.
मामला पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित था. याचिकाकर्ताओं का चयन होने के बावजूद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द कर दी गई थी कि उन्होंने स्नातकोत्तर एवं बी.एड. की डिग्री एक ही सत्र में प्राप्त की थी. आयोग का कहना था कि दोनों पाठ्यक्रम एक साथ करने के कारण अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं.
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष यह दलील दी कि दोनों डिग्रियां मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से प्राप्त की गई हैं तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के अनुरूप हैं. सभी पक्षों की सुनवाई पूर्ण होने के बाद न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार को आदेश पारित करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने JSSC द्वारा जारी सभी विवादित (impugned) आदेशों को निरस्त कर दिया एवं याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति देने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उच्च न्यायालय के इस फैसले को डुअल डिग्री प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: नेकपूरा: ट्रेंकर ने बाइक सवार को मारी टक्कर, घायल गिरिडीह रेफर