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सिमडेगा: जर्जर स्कूल से खतरा बढ़ा तो ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाई बांस की पाठशाला

हरेक अभिभावक के सपने होते हैं कि उनके बच्चे अच्छे तरीके से शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारें. सिमडेगा के बानो में एक ऐसा हीं मामला सामने आया, जिसमें अपने बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए सपने पाले

By : Vaibhaw Vikram
सिमडेगा: जर्जर स्कूल से खतरा बढ़ा तो ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाई बांस की पाठशाला

न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क:
हरेक अभिभावक के सपने होते हैं कि उनके बच्चे अच्छे तरीके से शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारें. सिमडेगा के बानो में एक ऐसा हीं मामला सामने आया, जिसमें अपने बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए सपने पाले अभिभावकों अपने बच्चों को सुरक्षित शिक्षा दिलाने के लिए श्रमदान कर बच्चों के लिए लिए शिक्षा के मंदिर बनाए. 

क्या आपने कभी कंक्रीट की दीवारों से दूर पूरी तरह इको फ्रेंडली स्कूल देखा है. जहां बच्चे बांस और तिरपाल से बनी झोपड़ी में पढ़ाई कर अपने भविष्य को संवार रहे हैं. दरअसल बानो के हल्दीबेड़ा प्राथमिक विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. छत जगह-जगह से टपक रही है. बारिश शुरू होते ही पूरा कमरा पानी से भर जाता है.ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन कभी भी भरभराकर गिर सकता है. ऐसे में बच्चों को सुरक्षित तरीके से शिक्षा दिलाना ग्रामीणों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया. कई वर्षों से ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से नए भवन की मांग की. 

आवेदन दिए गए, शिकायतें की गईं, अधिकारियों के चक्कर लगाए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. जब कहीं से कोई मदद नहीं मिली और बारिश का मौसम शुरू हो गया, तब गांव के लोगों ने खुद जिम्मेदारी उठाई. ग्रामीणों ने श्रमदान किया. किसी ने बांस दिया, किसी ने तिरपाल, किसी ने मेहनत. देखते ही देखते विद्यालय परिसर में एक झोपड़ीनुमा अस्थायी स्कूल तैयार कर दिया गया. आज उसी झोपड़ी में बैठकर बच्चे अपनी पढ़ाई कर रहे हैं.

ग्रामीणों की एक छोटी से पहल ने बच्चों को अस्थायी रूप से सुरक्षित शिक्षा दिलाने की व्यवस्था तो कर दी है. लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय के लिए नहीं है. अब बारी है झारखंड सरकार की. सरकार जल्द इन बच्चों के सुरक्षित शिक्षा के लिए नजरें इनायत करे. जिससे उज्जवल भविष्य के सपने संजोए इन बच्चों की शिक्षा निर्बाध और सुरक्षित तरीके से चलता रहे.

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