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रांची/डेस्क: JSSC CGL की परीक्षा को रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से जवाब दाखिल किया गया और उनकी ओर से बहस पूरी कर ली गई. प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई कि JSSC CGL की परीक्षा को लेकर 21 और 22 सितंबर 2024 को पूरे झारखंड में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी. इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के डिवीजन ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था साथ ही सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP भी खारिज हो चुकी है.
प्रार्थियों ने कहा कि अब तक हुई गिरफ्तारियों में केवल सात JSSC CGL अभ्यर्थी के नाम सामने आए हैं. जांच में एक्सटॉर्शन की बात सामने आई है, लेकिन पेपर लीक की बात सामने नहीं आई. प्रार्थियों की ओर से यह भी कहा गया कि अब तक की जांच में न तो कोई क्वेश्चन पेपर बरामद हुआ है और न ही किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से प्रश्नपत्र मिलने की बात सामने आई है. प्रार्थियों ने दलील दी कि जिन प्रश्नों को लीक बताया गया, उनमें से अधिकतर गेस किए गए प्रश्न थे. उनका आरोप था कि छात्रों के दबाव और हड़बड़ी में परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया.
हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच की गति को लेकर सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि तीन साल में जांच पूरी क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जांच में अचानक तेजी कैसे आ गई?
सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दो रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश की गईं. हालांकि, वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के पास रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध नहीं होने के कारण बहस के दौरान इस पर भी स्थिति स्पष्ट की गई.
सरकार की ओर से बताया गया कि JPSC की जांच शुरू होने के बाद जांच के दौरान JSSC CGL का कनेक्शन भी सामने आया. सरकार ने कहा कि अभय तिवारी, उसके भाई और भाभी का CGL में चयन हुआ था. सरकार की ओर से बताया गया कि जांच के दौरान कई तथ्य सामने आए, जिन्हें कैबिनेट के समक्ष रखा गया. इसके बाद कैबिनेट ने परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया.
सरकार ने यह भी बताया कि जांच में सामने आया कि केवल नेपाल में ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्थानों पर भी अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए गए थे. जांच में कई स्थानों का पता चला है, जबकि कई अन्य स्थानों का पता लगाना कठिन है. सरकार की ओर से दलील दी गई कि इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं. बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के बीच सही और गलत अभ्यर्थियों की पहचान कर पाना कठिन है. मामले में राज्य सरकार की ओर से पेश दोनों सीलबंद रिपोर्टों पर आगे सुनवाई होगी. हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को सुबह 11 बजे होगी.
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