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रांची/डेस्क: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट से झटका लगा है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने उनके खिलाफ विशेष अदालत में तय आरोपों में संशोधन की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है. अदालत के इस फैसले के बाद अब विशेष अदालत में मधु कोड़ा के खिलाफ पहले से तय आरोपों के आधार पर ही मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी. मधु कोड़ा की ओर से रांची की विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोपों में संशोधन की मांग वाली उनकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी करते हुए याचिका खारिज कर दी गई.
CBI और ED की जांच में अपराध की राशि को लेकर था विवाद
मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रहे मुकदमे से जुड़ा है. मधु कोड़ा की ओर से दलील दी गई थी कि मामले की जांच करने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित अपराध से अर्जित राशि यानी Proceeds of Crime को लेकर अंतर है. बचाव पक्ष ने इसी आधार पर विशेष अदालत में पहले से तय आरोपों में संशोधन की मांग की थी. हालांकि, विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार नहीं की. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया.
2009 की FIR से शुरू हुई थी जांच
मधु कोड़ा से जुड़ा यह मामला वर्ष 2009 में दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या 09/2009 से जुड़ा है. आरोप है कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मधु कोड़ा ने पद का दुरुपयोग किया और आपराधिक साजिश के जरिए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की. जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में अवैध खनन, कोयला ब्लॉक आवंटन और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी जांच की गई. आरोप यह भी है कि कथित तौर पर अर्जित रकम को विभिन्न माध्यमों से छिपाने और दूसरे स्थानों पर निवेश करने की कोशिश की गई. बाद में इस मामले की जांच CBI और ED ने की. जांच के दौरान तत्कालीन सरकार में शामिल रहे कुछ पूर्व मंत्रियों और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की गई तथा संबंधित मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए.
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