संतोष मेहता/न्यूज़ 11 भारत
खूंटी/डेस्क: जिले के मारंगहादा थाना क्षेत्र के पतरा टोली गांव से एक बेहद चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति को मृत समझकर उसके परिवार और ग्रामीणों ने किसी दूसरे अज्ञात व्यक्ति के शव को गांव लाकर सामाजिक रीति-रिवाज के साथ दफना दिया. लेकिन कुछ दिनों बाद वही व्यक्ति जिंदा घर लौट आया, जिसके बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई. मिली जानकारी के अनुसार, बीते 11 मई को खूंटी थाना क्षेत्र के डडगामा गांव के समीप एक नाली से अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया था. पुलिस शव की पहचान कराने में जुटी हुई थी. इसी बीच पतरा टोली निवासी विश्राम मुंडा के परिजन और ग्रामीण पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव की पहचान विश्राम मुंडा के रूप में कर दी. पहचान के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद गांव लाकर पूरे सामाजिक रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दफना दिया गया.
दरअसल, विश्राम मुंडा 10 मई को अपने परिवार के साथ डडगामा गांव में आयोजित एक शादी समारोह में गए थे. वहीं से वे अचानक लापता हो गए. काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका पता नहीं चला तो परिजनों ने थाना पहुंचकर गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. इसी दौरान नाली से मिले शव की तस्वीर देख परिवार वालों और ग्रामीणों ने उसे विश्राम मुंडा समझ लिया. बताया गया कि मृतक का चेहरा विश्राम मुंडा की तस्वीर से काफी मिलता-जुलता था, जिसके कारण यह भ्रम पैदा हुआ.
घटना ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब दफनाने के कुछ दिन बाद विश्राम मुंडा अचानक जिंदा वापस लौट आए. वे सीधे खूंटी स्थित अपनी बेटी के किराए के मकान पहुंचे. उन्हें सामने देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए. देखते ही देखते गांव में यह खबर फैल गई और पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया.
मामले की जानकारी मिलते ही ग्राम सभा सक्रिय हुई और गांव में बैठक बुलाई गई. पंचायत के मुखिया प्रेम टूटी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों और परिजनों ने फोटो के आधार पर शव की पहचान की थी. चेहरा काफी हद तक मिलता था, इसलिए सभी लोग धोखा खा गए. उन्होंने पंचायत की ओर से सार्वजनिक रूप से इस भूल के लिए माफी मांगते हुए कहा कि यह गलती अनजाने में हुई है.
ग्राम प्रधान जोलेन टूटी ने भी माना कि परिवार और ग्रामीणों ने जल्दबाजी में शव की पहचान कर ली थी. उन्होंने कहा कि विश्राम मुंडा के लापता होने से परिवार तनाव में था और मृतक का चेहरा उनसे मिलता-जुलता होने के कारण यह बड़ी भूल हो गई.
वहीं जिंदा लौटे विश्राम मुंडा ने बताया कि वे बिना किसी को जानकारी दिए घूमने के लिए रामगढ़ चले गए थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने परिवार को कहीं जाने की सूचना नहीं दी थी, जिसके कारण सभी लोग परेशान हो गए. उन्होंने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि उनके कारण गांव और परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा.
इधर मामले पर एसडीपीओ वरुण रजक ने कहा कि जिस शव को विश्राम मुंडा समझकर दफनाया गया है, उसकी अब दोबारा पहचान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. एफएसएल टीम आवश्यक साक्ष्य जुटा चुकी है. अब यदि कोई व्यक्ति शव की पहचान के लिए सामने आता है तो डीएनए जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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