न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
नवादा - नवादा जिले के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात में पर्यटकों की बढ़ती भीड़ और व्यवस्थागत दबाव को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश, पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान और वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा संयुक्त निरीक्षण के बाद प्रवेश शुल्क और पार्किंग दरों में संशोधन किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों की सुविधा बढ़ाना, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भीड़ को नियंत्रित करना है। लगातार बढ़ते पर्यटक दबाव के कारण स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, पार्किंग और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भारी असर पड़ रहा था, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
हाईलाइट्स -
- ककोलत जलप्रपात में प्रवेश शुल्क और पार्किंग दरों में संशोधन
- डीएम, एसपी और वन विभाग के संयुक्त निरीक्षण के बाद फैसला
- भीड़ नियंत्रण के लिए रोजाना 8000 टिकट की सीमा तय
- कुंड क्षेत्र में अधिकतम 1 घंटे का ठहराव नियम लागू
- वीकडे और वीकेंड के लिए अलग-अलग प्रवेश शुल्क
- नई व्यवस्था 21 मई 2026 से लागू होकर जुलाई तक प्रभावी
भीड़ नियंत्रण और नई व्यवस्था
प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। अब प्रतिदिन अधिकतम 8000 टिकट ही जारी किए जाएंगे ताकि स्थल पर अनियंत्रित भीड़ न हो सके। कुंड क्षेत्र में एक समय में सीमित संख्या में ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा। सबसे अहम बदलाव यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए अधिकतम ठहराव अवधि एक घंटे निर्धारित की गई है। एक घंटे बाद पुराने पर्यटकों को बाहर निकाला जाएगा और नए पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा, जिससे सभी लोग सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से जलप्रपात का आनंद ले सकें। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल भीड़ नियंत्रित होगी बल्कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।
नई दरें और लागू होने की तिथि
संशोधित शुल्क संरचना में भी बदलाव किया गया है। सोमवार से शुक्रवार (मंगलवार को जलप्रपात बंद रहेगा) प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार को यह शुल्क बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही दोपहिया वाहन पार्किंग के लिए 100 से 200 रुपये और चारपहिया वाहन पार्किंग के लिए 200 से 400 रुपये तक शुल्क तय किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये सभी नए नियम 21 मई 2026 से लागू होंगे और जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य पर्यटन स्थल को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, ताकि ककोलत जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता भी संरक्षित रह सके और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
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