'24 घंटे में झोला उठाकर निकल जाऊंगा...', सम्राट चौधरी का विपक्ष पर बड़ा हमला

बिहार में सरकारी बंगले पर मचे सियासी घमासान के बीच डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पद या घर का मोह नहीं है, पार्टी का आदेश मिलते ही वह 24 घंटे में आवास छोड़ दे

By : Anshuman Parashar
'24 घंटे में झोला उठाकर निकल जाऊंगा...', सम्राट चौधरी का विपक्ष पर बड़ा हमला

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की सियासत में इन दिनों सरकारी आवासों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बंगले पर छिड़े विवाद के बीच सूबे के मुखिया ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. सम्राट चौधरी ने कहा कि वह राजनीति में किसी बंगले या सुख-सुविधा के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प के साथ आए हैं. उन्होंने खुला ऐलान किया कि जिस पल उनके नेतृत्व और पार्टी का आदेश आएगा, वह महज एक दिन के भीतर अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर अपने निजी घर लौट जाएंगे. उनका कहना है कि लोकतंत्र में कोई भी पद या घर हमेशा के लिए नहीं होता.

'जनता की संपत्ति है बंगला, किसी की निजी जागीर नहीं'

सरकारी सुविधाओं के प्रति अपने नजरिए को साझा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने एक पुरानी घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कार्यभार संभालने के बाद जब वह पहली बार अपने तय आवास पर पहुंचे, तो उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे. उन्होंने बंगले के बाहर साफ अक्षरों में लिखवाया कि यह किसी बड़े अधिकारी या नेता का महल नहीं, बल्कि एक 'लोकसेवक का निवास' है. सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि नियम कायदों से मिलने वाली सुविधाएं समय पूरा होने पर छोड़नी ही पड़ती हैं, इन्हें अपनी बपौती समझना गलत है.

11वें सरकारी घर में रहने वाले नेता को नहीं है मोह

अपने लंबे राजनैतिक सफर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वह मंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री जैसे कई रसूखदार पदों पर काम कर चुके हैं. इसके बावजूद एक लंबा वक्त उन्होंने अपने निजी मकान में ही गुजारा है. उन्होंने बताया कि राजनीति के इस सफर में वह अब तक 10 बार सरकारी घर बदल चुके हैं और मौजूदा आवास उनके जीवन का 11वां ठिकाना है. बार-बार जगह बदलने के बाद भी उनके मन में कभी भी इन दीवारों से लगाव पैदा नहीं हुआ.

'कुछ लोगों को पूरे कुनबे के लिए चाहिए अलग-अलग महल'

सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन के दौरान बिना किसी का नाम लिए विपक्षी खेमे के शीर्ष नेताओं पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि बिहार में कुछ नेताओं का सरकारी जमीनों और मकानों से ऐसा जुड़ाव है कि उन्हें जनता से ज्यादा अपने कमरों की फिक्र रहती है. परिवारवाद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यहां कुछ लोगों को अपने बेटों और रिश्तेदारों के लिए अलग-अलग आलीशान बंगले चाहिए होते हैं, जबकि हमारी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ बिहार का विकास है.

सुशासन और पारदर्शिता ही सरकार का एकमात्र लक्ष्य

भाषण के अंत में उन्होंने राज्य की जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार पूरी ईमानदारी के साथ विकास कार्यों को गति देती रहेगी. लोकतंत्र में जनता को ही सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि हर जनप्रतिनिधि को समाज के प्रति जवाबदेह होना चाहिए. बिहार में सुशासन की गाड़ी बिना रुके आगे बढ़ती रहेगी और सरकार का हर फैसला आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा.

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