न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की सियासत में आज एक युग का अंत और दूसरे का उदय हुआ है। दो दशकों तक नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमने वाली सत्ता अब सम्राट चौधरी के हाथों में शिफ्ट हो गई है। भाजपा ने सम्राट को मुख्यमंत्री चुनकर यह साफ कर दिया है कि पार्टी अब बिहार में किसी के पीछे चलने के बजाय खुद फ्रंट फुट पर राजनीति करेगी। दिल्ली दरबार से हरी झंडी मिलने के बाद पटना में उनके नाम का जयघोष शुरू हो चुका है।
7% वोट बैंक से बिछाई जीत की बिसात
सम्राट चौधरी की ताजपोशी के पीछे सबसे बड़ा गणित लव-कुश समीकरण है। बिहार की लगभग ६० विधानसभा सीटों पर कुशवाहा समाज की निर्णायक भूमिका रहती है। सम्राट इसी समाज के सबसे प्रभावशाली चेहरे हैं। ७ प्रतिशत के इस वोट बैंक को साधकर भाजपा ने विपक्ष के सामाजिक न्याय के नारे की काट ढूंढ ली है, जिससे आने वाले चुनावों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
राजद से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक
सम्राट चौधरी का राजनीतिक ग्राफ किसी फिल्मी पटकथा जैसा है। 90 के दशक में राजद से करियर शुरू करने वाले सम्राट ने राबड़ी देवी सरकार में बेहद कम उम्र में मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। २०१८ में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन को नई धार दी। प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली ने हाईकमान का दिल जीत लिया, जिसका इनाम आज उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में मिला है।
शकुनी चौधरी की विरासत से आगे अपना वजूद
हालांकि सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है और उनके पिता शकुनी चौधरी का तारापुर में सिक्का चलता था, लेकिन सम्राट ने खुद को महज एक 'पुत्र' तक सीमित नहीं रखा। अपनी जुझारू छवि और आक्रामक बयानों से उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई। तारापुर का जो किला उनके परिवार ने बनाया था, सम्राट ने उसे अपनी मेहनत से बिहार की सत्ता का केंद्र बना दिया।
पगड़ी वाली कसम और बदला हुआ रिश्ता
एक समय था जब सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के खिलाफ सिर पर पगड़ी बांधकर उन्हें सत्ता से हटाने की शपथ ली थी। राजनीति में यह कसम काफी चर्चा में रही। हालांकि, वक्त के साथ तल्खी कम हुई और उन्होंने राजनीतिक मैच्योरिटी दिखाते हुए नीतीश कुमार के साथ मिलकर काम किया। इस विश्वास और तालमेल ने ही आज सत्ता के हस्तांतरण को इतना सुगम और विवादहीन बना दिया है।
शैक्षणिक योग्यता और विजन
मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त सम्राट चौधरी ने नगर विकास और पंचायती राज जैसे जमीनी विभागों को अपनी सूझबूझ से चलाया है। उनकी प्रशासनिक पकड़ और क्षेत्रीय समस्याओं की गहरी समझ ही बिहार के विकास में संजीवनी का काम करेगी। भाजपा अब उनके नेतृत्व में बिहार को एक नई और आत्मनिर्भर दिशा देने के लिए तैयार है।