कर्नाटक में कुर्सी की जंग फिर हुई तेज, सिद्धारमैया ही बने रहें सीएम या फिर डीके ...

कर्नाटक में कुर्सी की जंग फिर हुई तेज, सिद्धारमैया ही बने रहें सीएम या फिर डीके सम्भालें कमान, कांग्रेस आलाकमान परेशान!

कर्नाटक में कुर्सी की जंग फिर हुई तेज सिद्धारमैया ही बने रहें सीएम या फिर डीके सम्भालें कमान कांग्रेस आलाकमान परेशान

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: कांग्रेस की मुसीबत कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती.  एक राज्य का मामला सुलझता है तो दूसरे राज्य की समस्या सामने खड़ी हो जाती है. अभी हाल ही में केरल का चुनाव भारी बहुमत के जीतने के बाद भी सीएम की कुर्सी को लेकर पेंच कई दिनों तक फंसा रहा. अब दक्षिण के एक दूसरे राज्य में भी सीएम की कुर्सी के विवाद ने सिर उठा दिया है. यह राज्य है कर्नाटक और कुछ दिनों तक सीएम की कुर्सी का खेल थमने के बाद फिर से शुरू हो गया है. कांग्रेस आलाकमान अब यह नहीं समझ पा रहा है कि कुर्सी आखिर दें तों किसे दें. सिद्धारमैया जो कि वर्तमान में कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं, वह कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते जबकि डीके शिवकुमार कर्नाटक चुनाव के समय की शर्तों के अनुसार कुर्सी पर बैठना चाहते हैं. भले ही उस समय ऐसी कोई शर्त सामने नहीं आयी थी, लेकिन अंदरूनी सूत्र यही बतातें हैं कि शिवकुमार इसी शर्त पर मुख्यमंत्री बनने को तैयार नहीं हुए थे कि पहले ढाई वर्ष सिद्धारमैया सीएम की कुर्सी पर बैठेंगे उसके बाद शिवकुमार को कुर्सी पर बैठने का मौका मिलेगा.

अब जब दूसरे राज्यों का कलह शांत हो चुका है, कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी कलह फिर शुरू हो गया है. कहने को तो सिद्धारमैया और डीके के बीच जो गतिरोध बना हुआ है, पार्टी आलाकमान जल्द बड़ा फैसला ले उसे सुलझाएगा, लेकिन सच यह है कि इस पेंच को सुलझाने में आलाकमान के पसीने निकल आये हैं. क्योंकि वह जिन्हें भी सत्ता की चाबी सौंपे, नुकसान तो दोनों ही हालत में उठाना पड़ेगा. फिलहाल खबर यह है कि कांग्रेस ने सीएम सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है. इस महीने पार्टी दिल पर पत्थर रखकर कोई न कोई बड़ा फैसला ले ही लेगी. हो सकता है कि सिद्धारमैया के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को भी दिल्ली बुलाया जा सकता है.

कांग्रेस के पास हैं तीन विकल्प

कांग्रेस पार्टी का फैसला चाहे जो भी हो, उसके पास इस समस्या को लेकर तीन ही विकल्प हैं. पहला विकल्प सिद्धारमैया को ही मुख्यमंत्री बना रहने दिया जाए. लेकिन इसके लिए डीके को मनाना होगा, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं दिख रहा है.

दूसरे विकल्प के रूप में सिद्धारमैया को सीएम बना रहने देते हुए कैबिनेट में कुछ बड़े फेरबदल कर डीके शिवकुमार और उनके गुट को खुश करने का प्रयास किया जा  सकता है, मगर इस विकल्प का मतलब होगा कि डी.के. शिवकुमार को राज्य के शीर्ष पद पर पहुंचने के लिए अगले चुनाव तक इन्तजार करना पड़ेगा. मगर कांग्रेस को ऐसा करने के लिए भी डी.के. शिवकुमार को मनाना होग. सम्भव है, शिवकुमार के भाई और करीबी सहयोगियों को बड़ी भूमिकाएं देकर मामला को सुलझाने का प्रयास किया जा सकता है.

अंतिम विकल्पयह है कि सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए मनाया जाए. और पावर शेयरिंग के वादे के अनुरूप डी.के. को मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ किया जा सके. मगर ऐसा होना भी आसान नहीं लगता. क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर जो दो ध्रुव बन चुके हैं, असल समस्या की जड़ वही है और जिसका भविष्य में क्या असर होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल आलाकमान के सामने जो समस्या है, उसका वह क्या समाधान निकालता है, यह देखना ज्यादा दिलचस्प होगा.

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