न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अश्मित सिन्हा ( संवाददाता ) / पटना - मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में राज्य के शिक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। बैठक में सबसे अहम निर्णय यह रहा कि 1 जुलाई से उन 211 प्रखंडों में डिग्री स्तर की पढ़ाई शुरू की जाएगी, जहां अब तक डिग्री कॉलेजों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी से राहत देना है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल नामांकन बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा के प्रति सामाजिक समानता भी मजबूत होगी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कॉलेजों की स्थापना ऐसे स्थानों पर की जाएगी जहां छात्रों को आने-जाने में किसी तरह की कठिनाई न हो, जिससे शिक्षा की पहुंच अधिक सुलभ और व्यावहारिक बन सके।
हाईलाइट्स -
- 211 प्रखंडों में 1 जुलाई से डिग्री पढ़ाई शुरू करने का निर्देश
- विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन के लिए भूमि हस्तांतरण तेज होगा
- सभी शोध केंद्रों का पुनर्गठन कर उन्हें विशेषीकृत बनाया जाएगा
- डिग्री कॉलेजों का नामकरण भूमि दानदाताओं के नाम पर होगा
- ओपन यूनिवर्सिटी मॉडल लागू करने पर सरकार का जोर
- खाली पदों पर एक साथ भर्ती के लिए कमिटी गठन का निर्णय
- टॉप 10 विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू कर गुणवत्ता सुधार की योजना
विक्रमशिला विश्वविद्यालय पुनर्स्थापन और शोध संस्थानों का पुनर्गठन
बैठक में ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व वाले विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके लिए भूमि शीघ्र भारत सरकार को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है, ताकि परियोजना पर तेजी से काम आगे बढ़ सके। इसके साथ ही राज्य के सभी शोध केंद्रों को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे उन्हें अधिक विशेषीकृत और व्यवस्थित स्वरूप दिया जा सके। सरकार का उद्देश्य शोध गतिविधियों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को बढ़ावा देना है। इससे बिहार को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए भर्ती, एमओयू और नई व्यवस्था की तैयारी
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रशासनिक और संरचनात्मक सुधारों पर भी जोर दिया गया। डिग्री कॉलेजों का नामकरण अब भूमि दानदाताओं या उनके अनुशंसित व्यक्तियों के नाम पर करने का निर्णय लिया गया है, जिससे स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालयों पर बढ़ते शैक्षणिक बोझ को कम करने के लिए नई रणनीति अपनाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही खाली पदों पर नियुक्ति के लिए एक विशेष कमिटी गठित कर एक साथ वैकेंसी जारी करने की योजना बनाई गई है। बैठक में ओपन यूनिवर्सिटी मॉडल का अध्ययन कर बिहार में नई प्रणाली लागू करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही, राज्य के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू कर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधार लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही गई।
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