आशिष शास्त्री/न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क: होली पर अबकी 122 साल बाद चंद्रग्रहण लग रहा है. होलाष्टक के समापन और होलिका दहन के आसपास चन्द्र ग्रहण पड़ने के होलिका दहन का गणित गड़बड़ा गया है. जानिए चंद्रग्रहण का और होलिका दहन का सिमडेगा समयानुसार समय. जाने कब खेलें होली.
चंद्रग्रहण के साए में होली को लेकर ज्योतिषाचार्य भी अपने-अपने तरीके से ग्रहणकाल से बाद ही होलिका दहन को शास्त्र सम्मत बता रहे हैं. लोक जीवन में ग्रहण से पूर्व होलिका दहन दो मार्च को करना उचित माना जा रहा है. हालांकि कुछ लोग दो मार्च को भद्रा का तर्क दे रहे हैं. लेकिन उसका जबाव यह दिया जा रहा है कि भद्रा में मुख का अभाव है. अभी तक होलिका दहन के अगले दिन होली होती रही है. लेकिन चंद्रग्रहण के कारण होली का त्यौहार एक दिन बाद होगा.
आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने बताया कि इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरंभ दो मार्च को सायं 5 बजकर 56 मिनट से होगा और यह तीन मार्च को सायं 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. सामान्यतः होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा काल के समाप्त होने के बाद करना शुभ माना जाता है. आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने बताया कि दो मार्च की संध्या में भद्रा का प्रभाव संध्या 05: 16 बजे से प्रारंभ होगा जो 03 मार्च मंगलवार के अहले सुबह 04: 55 तक रहेगा. सिमडेगा के प्रिंस चौक पूजा पंडाल में 03 मार्च की अहले सुबह 4:55 से 05:30 बजे के बीच होगा.
03 मार्च को चंद्रग्रहण भी दोपहर 03:20 से लगेगा. जिस कारण ग्रहण का सूतक काल 03 मार्च की प्रातः 6:20 बजे से शुरू होगा. आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने कहा कि सूतक काल से ग्रहण के मोक्ष तक धार्मिक अनुष्ठान निषेध रहते हैं. उन्होंने बताया कि ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे होगा, ग्रहण पूर्णता आरंभ सायं 5:59 बजे होगा और ग्रहण समाप्त सायं 6:47 बजे होगा. ग्रहण की उपछाया 03 मार्च की संध्या 07:55 बजे समाप्त होगी.
चंद्रग्रहण का प्रभाव कुछ राशियों के लिए लाभ तो कुछ के लिए हानिकारक है.
चंद्र ग्रहण का फल मेष: चिन्ता, वृष: व्यथा, मिथुन: श्री, कर्क: क्षति, सिंह: घात, कन्या: हानि, तुला: लाभ, वृश्चिक: सुख, धनु: माननाश, मकर:मृत्युतुल्य कष्ट, कुम्भ: स्त्री पीड़ा, मीन: सौख्य होगा.
आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, 04 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन देशभर में रंगों का पर्व होली को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाएगा.
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