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रांची/डेस्क: रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी आर्किटेक्ट बिनोद कुमार सिंह की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया. बिनोद कुमार सिंह ने रांची की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. निचली अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ पर्याप्त सामग्री और गंभीर संदेह होने की बात कहते हुए डिस्चार्ज देने से इनकार कर दिया था.
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ विवादित जमीन से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और जालसाजी के जरिए इसे हासिल करने की कोशिश की गई थी. इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की जा रही है. ED की जांच में आर्किटेक्ट बिनोद कुमार सिंह की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. एजेंसी के अनुसार, बिनोद सिंह के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद हुई थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने उक्त जमीन पर प्रस्तावित बैंक्वेट हॉल का आर्किटेक्चरल नक्शा और डिजाइन तैयार कर साझा किया था.
डिस्चार्ज याचिका पर निचली अदालत में क्या हुआ था?
बिनोद सिंह की ओर से रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर उन्हें मामले से मुक्त करने की मांग की गई थी. उनकी ओर से दलील दी गई थी कि जमीन पर नक्शा तैयार करना उनका पेशेवर कार्य था और केवल नक्शा तैयार करने के आधार पर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता.
ED ने इसका विरोध किया था. जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि बिनोद सिंह की भूमिका को केवल एक आर्किटेक्ट के पेशेवर काम तक सीमित नहीं माना जा सकता और जांच के दौरान उनके खिलाफ ऐसी सामग्री सामने आई है, जिस पर ट्रायल की आवश्यकता है.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष अदालत ने 10 जून 2026 को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ गंभीर संदेह पैदा करने वाली सामग्री होने की बात कही थी. इसके बाद विशेष अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही हुई और 1 अक्टूबर 2026 को आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया पूरी हुई.
हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने रखी दलील
निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए बिनोद कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान उनकी ओर से डिस्चार्ज दिए जाने के पक्ष में दलीलें रखी गईं. वहीं, ED की ओर से याचिका का विरोध किया गया. एजेंसी की ओर से दलील दी गई कि मामले में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता और आरोपों की वास्तविकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाना चाहिए. सुनवाई के दौरान पीएमएलए की संबंधित धाराओं और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध सामग्री पर भी पक्षों की ओर से दलीलें दी गईं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.