मनीष मंडल/न्यूज 11 भारत
बेंगाबाद/डेस्क: झारखंड के गिरिडीह जिले अंतर्गत बेंगाबाद प्रखंड के मोतीलेदा गांव में लोक आस्था का महापर्व 'डलिया पर्व' पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया. चार दिवसीय इस अनुष्ठान का आज तीसरा दिन था, जब डूबते हुए सूर्य भगवान भास्कर को नदी में अर्घ्य दिया गया.
आज संध्या के समय गांव की नदी के तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. हजारों की संख्या में व्रती महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर नदी घाट पर पहुंचे. सिर पर डलिया, सूप और कलश में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल और दीप लेकर व्रतियों ने नदी के जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया. 'कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए' जैसे पारंपरिक छठ गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया.
मोतीलेदा में डलिया पर्व की विशेष मान्यता है. इसे यहां छठ महापर्व के ही स्थानीय स्वरूप में मनाया जाता है, जिसमें 'डलिया' यानी बांस की टोकरी का विशेष महत्व होता है. व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर भगवान भास्कर और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
आज के संध्या अर्घ्य के अवसर पर क्षेत्र के समाजसेवी उमाशंकर राणा, नागेश्वर राणा, मुकेश राणा, अनिल राणा, अजय राणा, उमेश राणा समेत कई गणमान्य लोग और ग्रामीण मौजूद रहे. उमाशंकर राणा ने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है और सामाजिक एकता का प्रतीक है. यहां सभी जाति-धर्म के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं.
घाट पर सुरक्षा और साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. स्थानीय युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में व्यवस्था संभाली. देर शाम तक आतिशबाजी और दीपों से नदी तट जगमगाता रहा.
कल प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ इस महापर्व का समापन होगा. उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती अपना व्रत तोड़ेंगे और प्रसाद वितरण करेंगे. मोतीलेदा में हर साल मनाया जाने वाला यह डलिया पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है, जिसमें आस्था, परंपरा और सामूहिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
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