निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित करने की जताई आशंका

निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित करने की जताई आशंका

निलंबित ias विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित करने की जताई आशंका 

न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क:
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग भूमि म्यूटेशन मामले में जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले में राहत देने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की पीठ ने सुनवाई के दौरान आरोपों की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को महत्वपूर्ण आधार माना. यह मामला हजारीबाग में वन भूमि के कथित अवैध म्यूटेशन से जुड़ा है. ACB द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, विनय चौबे पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उक्त जमीन को निजी व्यक्तियों बिनय कुमार सिंह और स्निग्धा सिंह के नाम पर दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया.

विनय चौबे की आय 2.20 करोड़, खर्च 3.47 करोड़ रुपये 
सुनवाई के दौरान ACB ने अदालत के समक्ष कई अहम तथ्य रखे. एजेंसी के मुताबिक, तत्कालीन अंचल अधिकारी अलका कुमारी ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उस समय के उपायुक्त विनय चौबे ने उन्हें म्यूटेशन करने के लिए दबाव डाला था. उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा था कि संबंधित भूमि गैरमजरूआ खास और जंगल श्रेणी की है, फिर भी निर्देश दिए गए. जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलू भी सामने आए हैं. ACB के अनुसार, आरोपित अवधि में विनय चौबे की घोषित आय करीब 2.20 करोड़ रुपये थी, जबकि उनके खर्च और संपत्ति का आंकड़ा 3.47 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इससे आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलते हैं.

गवाहों और सह-अभियुक्तों को प्रभावित किए जाने की प्रबल संभावना 
इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया है कि उनकी पत्नी और साले एक निजी कंपनी 'ब्रह्मास्त्र एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े हैं, जिसका उपयोग कथित तौर पर अवैध धन को वैध रूप देने के लिए किया गया. वर्ष 2010 से 2015 के बीच इस कंपनी में लगभग 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की बात भी सामने आई है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो गवाहों और सह-अभियुक्तों को प्रभावित किए जाने की प्रबल संभावना है, खासकर तब जब उनके अधीन कार्य कर चुके अधिकारियों ने ही उनके खिलाफ बयान दर्ज कराए हैं. इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी.

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