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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले स्थानांतरणों को लेकर अहम फैसला सुनाया हैं. अदालत ने धनबाद जिला बल से राज्य के अलग-अलग जिलों में भेजे गए 54 पुलिसकर्मियों के तबादले को नियम विरूद्ध मानते हुए रद्द कर दिया हैं. साथ ही सभी पुलिसकर्मियों को दोबारा धनबाद जिला बल में योगदान सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया हैं.
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
यह फैसला न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने W.P (S) No. 1781 of 2025 की सुनवाई के दौरान सुनाया. अदालत में स्पष्ट कहा कि किसी भी सरकारी कर्मी का स्थानांतरण तय नियमों और प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए. केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देकर मनमाने तरीके से तबादला नहीं किया जा सकता.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला उस समय शुरू हुआ, जब तत्कालीन एसएसपी धनबाद और तत्कालीन डीजीपी की ओर से 54 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग जिलों में ट्रांसफर कर दिया गया था. आदेश में प्रशासनिक आवश्यकता का हवाला दिया गया था. पुलिसकर्मियों का आरोप था कि यह स्थानांतरण नियमों के खिलाफ है और इसमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. उन्होंने विभागीय स्तर पर कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद मजबूरी में सभी कर्मियों ने नए जिलों में योगदान दे दिया.
न्याय के लिए पहुंचे हाईकोर्ट
विभागीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने के बाद सभी प्रभावित पुलिसकर्मियों ने न्याय की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि तबादले में नियमों की अनदेखी की गई है और यह निर्णय मनमाना हैं. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि स्थानांतरण प्रक्रिया में नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई. अदालत ने कहा कि बिना ठोस कारण और उचित प्रक्रिया के किए गए तबादले न्यायसंगत नहीं माने जा सकते. कोर्ट ने पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी ज्ञापांक 238/पी0 दिनांक 24 फरवरी, 2025 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया.
हाईकोर्ट ने झारखंड पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिया है कि सभी 54 पुलिसकर्मियों की दोबारा धनबाद जिला बल में पोस्टिंग सुनिश्चित की जाए. इस फैसले के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों में राहत की भावना देखी जा रही हैं. झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे धैर्य और न्याय की जीत बताया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रशासनिक आधार की आड़ में अनियमित स्थानांतरण किए जा रहे थे, जिसका संगठन लगातार विरोध करता रहा हैं.
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