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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 19 साल पुराने औद्योगिक विवाद को खारिज करते हुए इसे "बासी मामला" करार दिया है. अदालत ने सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारी की बहाली और बैक वेज देने का निर्देश दिया गया था. कंपनी ने सुबोध चंद्र गोराई को 24 जून 1982 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. उन पर वेतन राशि में हेराफेरी, मजदूरों को कम भुगतान करने और रिकॉर्ड में गड़बड़ी करने के आरोप लगे थे.
बताया गया कि कर्मचारी ने करीब 19 साल बाद इस विवाद को उठाया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इतनी लंबी देरी के बाद विवाद को जीवित नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले को इतने वर्षों बाद उठाने के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण पेश नहीं किया गया. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कर्मचारी पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर चुके थे, जहां उनकी याचिका और अपील दोनों खारिज हो चुकी थीं. हाईकोर्ट ने माना कि इन महत्वपूर्ण तथ्यों को ट्रिब्यूनल से छुपाया गया था.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ट्रिब्यूनल की उस टिप्पणी को भी गलत ठहराया, जिसमें कहा गया था कि औद्योगिक विवाद कभी भी उठाया जा सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में अनिश्चितकाल तक विवाद जीवित रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अनुभा रावत चौधरी की वेकेशन बेंच ने फैसला सुनाते हुए कर्मचारी को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया. इस फैसले से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है.
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