नंदकिशोर कुमार/न्यूज11 भारत
गुमला/डेस्क: सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है, लेकिन डुमरी प्रखंड की वृद्ध महिला तेतरी देवी के लिए यह योजना अभी तक अधूरा सपना बनकर रह गई है. योजना के तहत उन्हें आवास स्वीकृत तो मिला, लेकिन परिस्थितियों और निर्माण सामग्री की समस्या ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया.
जानकारी के अनुसार, आवास निर्माण के लिए जो सीमेंट गिरवाई गई थी, वह कुछ दिनों बाद ही खराब होकर पत्थर जैसी बन गई. इसके कारण घर निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ सका. आर्थिक रूप से कमजोर तेतरी देवी के लिए दोबारा सामग्री खरीदना संभव नहीं था, जिससे उनका घर बनने का सपना अधूरा रह गया.
आज स्थिति यह है कि तेतरी देवी के पास अपना रहने के लिए घर तक नहीं है. वह दूसरों के घरों में रहकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रही हैं. वृद्धावस्था में भी वह अपने शरीर की क्षमता के अनुसार काम कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रही हैं. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनके संघर्ष भी बढ़ते जा रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि तेतरी देवी बेहद गरीब परिवार से आती हैं और उनका जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है. लोगों का मानना है कि योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक उसका सही लाभ पहुंचना भी उतना ही जरूरी है.
तेतरी देवी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि उन चुनौतियों की भी तस्वीर है, जहां योजना मिलने के बावजूद कई लोग उसका पूरा लाभ नहीं ले पाते. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर वृद्ध महिला को आवश्यक सहायता दी जाए, ताकि उन्हें भी अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में एक सुरक्षित छत नसीब हो सके.
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