National Creator Economy Bill 2026: अब शौक नहीं, करियर बनेगा कंटेंट क्रिएशन! क्रिएटर्स को मिल सकती है नई पहचान

By : Mansi Kumari
National Creator Economy Bill 2026: अब शौक नहीं, करियर बनेगा कंटेंट क्रिएशन! क्रिएटर्स को मिल सकती है नई पहचान

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न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
भारत में तेजी से बढती डिजिटल दुनिया के बीच सोशल मीडिया पर काम करने वाले लाखों युवाओ के लिए बड़ी खबर सामने आई हैं. इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाकर कमाई करने वालों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया हैं. रिपोर्टर्स के मुताबिक, नेशनल क्रिएटर इकॉनमी बिल 2026 को राज्यसभा से मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद कंटेंट क्रिएटर्स को एक प्रोफेशनल वर्कफोर्स के रूप में मान्यता देने की दिशा में बड़ा रास्ता साफ हुआ हैं.

अब इन्फ्लुएंसर नहीं, प्रोफेशनल कहलाएंगे क्रिएटर्स
अब तक सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने, लाइव स्ट्रीम करने या डिजिटल कंटेंट तैयार करने वालों को अक्सर शौकिया काम करने वाला माना जाता है लेकिन इस बिल के बाद कंटेंट क्रिएशन को एक गंभीर और स्थायी करियर विकल्प के रूप में देखा जा सकता हैं. सरकार का मकसद इस तेजी से बढ़ते सेक्टर को संगठित ढांचे में लाना हैं.

बिल के जरिए क्या बादल सकता है?
इस प्रस्तावित कानून के तहत डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को कई तरह की सुविधाएं और सुरक्षा मिल सकती हैं. इनमें प्रोफेशनल पहचान, तय नियमों के तहत ब्रांड डील, पेमेंट सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शामिल बताई जा रही हैं. कई क्रिएटर्स की शिकायत रहती है कि ब्रांड्स समय पर भुगतान नहीं करते या शर्तें बदल देते हैं. नए बिल में स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम और विवाद समाधान व्यवस्था का प्रावधान बताया गया हैं. इससे क्रिएटर्स और कंपनियों के बीच पारदर्शिता बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, जो कंटेंट क्रिएटर्स एक तय सीमा से ज्यादा कमाई करते है, उन्हें सरकार के पास पंजीकरण कराना पड़ सकता हैं. इससे आय का रिकॉर्ड रहेगा, टैक्स प्रक्रिया आसान होगी और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी.

AI कंटेंट और पेड प्रमोशन पर सख्ती
इस बिल में यह भी कहा गया है कि अगर कंटेंट किसी ब्रांड के पैसे लेकर बनाया गया है तो उसकी स्पष्ट जानकारी देनी होगी. वहीं AI से बने कंटेंट का खुलासा करना भी जरुरी हो सकता है ताकि फेक या भ्रामक जानकारी पर रोक लगाई जा सकें. सरकार एक क्रिएटर वेलफेयर फंड बनाने पर भी विचार कर रही हैं. यह फंड डिजिटल विज्ञापनों पर छोटे से सेस के जरिए तैयार किया जा सकता हैं. इससे हेल्थ इंश्योरेंस, इमरजेंसी आर्थिक मदद और रिटायरमेंट जैसी सहायता दी जा सकती हैं. भारत में लाखों युवा फुल-टाइम कंटेंट क्रिएशन से जुड़े हुए हैं. ऐसे में यह बिल उन्हें आर्थिक स्थिरता, पहचान और भविष्य की सुरक्षा दे सकता हैं. 

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