ट्रंप के एक बयान से कांप उठा बाजार, कच्चे तेल में भारी भूचाल.. पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा बढ़ा

ट्रंप के एक बयान से कांप उठा बाजार, कच्चे तेल में भारी भूचाल.. पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा बढ़ा

ट्रंप के एक बयान से कांप उठा बाजार कच्चे तेल में भारी भूचाल पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा बढ़ा

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही हैं. अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया हैं. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें और महंगाई तेजी से बढ़ सकती हैं. 

110 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचरर्स में तेज उछाल दर्ज किया गया. कीमत करीब 1.32 फीसदी बढ़कर 110.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले कई हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा हैं. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी तेजी के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया. ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, फरवरी के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी हैं.

ट्रंप के बयान से बाजार में मची हलचल
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी हैं. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि “फैसला लेने का समय तेजी से खत्म हो रहा है" और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और शीर्ष अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें की हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा हैं. 

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होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा संकट
ऊर्जा बाजार में डर की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई में आई रुकावट हैं. यह समुद्री रास्ता दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में गिना जाता हैं. यहां तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों से होने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हो रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल संकट और गहरा सकता हैं.

रूस से सप्लाई पर भी दबाव
स्थिति इसलिए भी जटिल हो गई है क्योंकि अमेरिकी प्रशासन ने रूस से तेल खरीद पर ही गई कुछ छूट खत्म करने का फैसला लिया हैं. इससे पहले कई देश सस्ते रुसी तेल के जरिए बाजार को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे थे. अब सप्लाई पर बढ़ते दबाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा दिया हैं. 

खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा चिंता
हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के एक संवेदनशील ऊर्जा प्रतिष्ठान पर ड्रोन हमले की खबरों ने बाजार की चिंता को और गहरा कर दिया हैं. निवेशकों को डर है कि यदि ऊर्जा ठिकानों पर हमले बढ़ते हैं, तो तेल उत्पादन और सप्लाई दोनों बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं. बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए है कि जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती हैं. इससे मध्य पूर्व में फिर से बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई हैं.

भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन सकती हैं. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, गैस, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता हैं.


 

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