न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना। आपके घर में भी अगर बच्चे बड़े हो गए हो तो उनके खिलौने घर में पड़े पड़े खराब हो रहे होंगे। क्योंकि बच्चे बड़े हो चुके हैं और उन खिलौने की उन्हें आवश्यकता नहीं है। वह खिलौने आपके घर में पड़े पड़े खराब हो जाएंगे या टूट जाएंगे जिसे आप आने वाले समय में कचरे के पेटी में डाल देंगे। तो क्यों ना आप भी खिलौना दान अभियान से जुड़ जाए और उन बच्चों को खुशियां प्रदान करें जिनके परिवार अपने बच्चों को खिलौना खरीद कर नहीं दे सकते। क्योंकि सभी बच्चे खिलौने से खेलना चाहते हैं लेकिन गरीब परिवार के बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं। आप उन बच्चों में खुशियां बिखेर सकते हैं।
क्या है पोषण पखवाड़ा- 2026
इसके तहत राज्य की पंचायतों में ‘खिलौना दान अभियान’ की शुरुआत की गई थी। जो अब जन-आंदोलन के रूप में उभरकर सामने आया है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए अधिक जीवंत, सीखने योग्य और बाल-अनुकूल बनाना है, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें और उनका मानसिक, सामाजिक एवं रचनात्मक विकास सुनिश्चित हो सके।इसका संचालन पंचायती राज विभाग और निजी संस्था सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज (सी-थ्री) कर रहा है।
जनप्रतिनिधियों की भी है भागीदारी
बताया गया कि राज्य के कई जिलों में पंचायती राज संस्था (PRI) के प्रतिनिधियों और महिला जनप्रतिनिधियों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई है। जानकारी दी गई कि जनप्रतिनिधियों के साथ आमलोगों ने भी आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्वेच्छा से खिलौने दान किए हैं। वहीं, आंगनवाड़ी सेविकाओं, प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों व स्थानीय समुदाय की सहभागिता ने इस पहल को और प्रभावी बनाया गया है।
आपको यह भी बता दें कि, यह कदम स्थानीय सतत विकास लक्ष्य (एलएसडीजीएस)– थीम 2 ‘स्वस्थ ग्राम पंचायत’ की अवधारणा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के साथ बच्चों, महिलाओं एवं समुदाय के समग्र शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देने पर आधारित है। गौरतलब हैं कि बिहार की पंचायतों ने पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान कुल 73 लाख 4 हजार 316 गतिविधियों का आयोजन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं पोषण जन आंदोलन डैशबोर्ड पर 69 हजार 252 गतिविधियां दर्ज हुई, जो पंचायत स्तर पर बढ़ती सहभागिता का प्रमाण है।
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