न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क (अमित, सीतामढ़ी): बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत गेहूं की उपज और उत्पादन दर का सटीक आकलन करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इसी कड़ी में सीतामढ़ी जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने डूमरा प्रखंड की खैरवा पंचायत के खैरवा ग्राम में पहुंचकर गेहूं फसल की कटनी (Crop Cutting Experiment) का औचक निरीक्षण किया। डीएम को अचानक अपने बीच पाकर किसान उत्साहित दिखे।
वैज्ञानिक पद्धति से हुआ प्लॉट का चयन
फसल कटाई प्रयोग के दौरान डीएम ने रैंडम पद्धति (Random Selection) के जरिए प्लॉट का चयन कराया। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत 10 मीटर लंबा और 5 मीटर चौड़ा (कुल 50 वर्ग मीटर) का प्लॉट निर्धारित किया गया। फसल कटाई के बाद पाया गया कि इस 50 वर्ग मीटर के दायरे में 10 किलो 800 ग्राम गेहूं की उपज हुई है। इस आधार पर जिले में प्रति हेक्टेयर 21.60 क्विंटल उत्पादन का प्रारंभिक आकलन किया गया है।
किसानों की समस्याओं पर सीधी बात
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केवल आंकड़ों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने खेत की मेड़ पर खड़े होकर स्थानीय किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानी और किसानों से फीडबैक लिया। डीएम ने कहा कि किसान हमारे 'अन्नदाता' हैं और उनकी आय में वृद्धि करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले, इसके लिए पूरी गंभीरता से काम किया जा रहा है।
फसल सहायता योजना के लिए महत्वपूर्ण है यह प्रयोग
गौरतलब हो कि फसल कटनी प्रयोग उत्पादन की दर और संभावित क्षति के आकलन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य फसल सहायता योजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभ या मुआवजे का निर्धारण किया जाता है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटनी के आंकड़े पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज किए जाएं।
प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
इस विशेष निरीक्षण के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी शंभू मांझी, जिला कृषि पदाधिकारी, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी रणधीर कुमार, अमोद कुमार (अवर सांख्यिकी पदाधिकारी) मौजूद थे। साथ ही प्रखंड कृषि पदाधिकारी एवं कृषि समन्वयक रौशन कुमार, सिद्धार्थ शंकर, मुकुंद कुमार तथा रणकेशरी सिंह ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।