न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
राहुल कुमार / शेरघाटी - गया जिले के शेरघाटी नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पूर्व मुख्य पार्षद प्रतिनिधि सह भाजपा के शेरघाटी मीडिया प्रभारी विनय कुमार ने मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी पर मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत भेजते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
हाईलाइट्स-
- शेरघाटी नगर परिषद में करोड़ों रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप
- टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और मनमानी का दावा
- बिना जरूरी दस्तावेज वाली फर्मों को ठेका देने का आरोप
- 1.14 करोड़ के पेंटिंग कार्य में भारी गड़बड़ी की बात सामने आई
- जरुरत नहीं होने पर भी कागजों में काम दिखाकर भुगतान निकालने का आरोप
- वॉटर एटीएम, एलईडी और ओपन जिम योजनाओं में भी अनियमितता के आरोप
- अपने करीबियों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप
- ट्रांसफर के बाद भी टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप का दावा
- पिछले 10 महीनों के सभी टेंडरों की जांच की मांग
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग तेज
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फाउंटेन निर्माण कार्य के टेंडर में नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से कार्य आवंटित किए गए। जय शिव कंस्ट्रक्शन, के. इंटरप्राइजेज और सनराइज इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों को काम दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन फर्मों के पास आवश्यक दस्तावेज—जैसे पैन, जीएसटी और अन्य वैध कागजात—पूरी तरह उपलब्ध नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें टेंडर दे दिया गया।
पेंटिंग और फाउंटेन कार्य में गड़बड़ी का आरोप
विनय कुमार के अनुसार करीब 70,000 स्क्वायर फीट पेंटिंग कार्य के नाम पर भारी अनियमितता की गई। प्रति स्क्वायर फीट 163.14 रुपये की दर से भुगतान कर लगभग 1.14 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया। आरोप है कि जिन स्थानों पर पेंटिंग की आवश्यकता नहीं थी, वहां भी कागजों पर काम दिखाकर राशि निकाली गई। यहां तक कि नगर परिषद क्षेत्र से बाहर नेशनल हाईवे पर पेंटिंग दिखाने का भी दावा किया गया है।
वॉटर एटीएम, एलईडी और ओपन जिम पर भी सवाल
शिकायत में अन्य योजनाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वॉटर एटीएम निर्धारित सार्वजनिक स्थानों के बजाय अन्य जगहों पर लगाए जाने, एलईडी लाइट और डिस्प्ले के नाम पर फर्जी खर्च दिखाने तथा ओपन जिम जैसी योजनाओं में नियमों की अनदेखी करने का आरोप है।
अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
आवेदन में कहा गया है कि टेंडर पाने वाली कई फर्में मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी के रिश्तेदारों, परिचितों या मित्रों से जुड़ी हैं। कई फर्में टेंडर जारी होने से ठीक पहले रजिस्टर्ड हुईं, जबकि एक फर्म नगर परिषद के जेई के परिजन के नाम पर होने का भी आरोप लगाया गया है। इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ट्रांसफर के बाद भी हस्तक्षेप का आरोप
विनय कुमार ने आरोप लगाया कि कार्यपालक पदाधिकारी के ट्रांसफर के बाद भी उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया। कुछ निविदाओं को अब तक नहीं खोले जाने की बात भी सामने आई है, जिससे पारदर्शिता पर संदेह गहराता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यपालक पदाधिकारी को तत्काल निलंबित करने, पिछले 10 महीनों के सभी टेंडरों की जांच करने और संबंधित अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि उनके पास आरोपों से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
पुरानी पोस्टिंग पर भी उठे सवाल
विनय कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी ने अपनी पिछली पोस्टिंग में भी इसी तरह की अनियमितताएं की थीं और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
कई स्तरों पर भेजी गई शिकायत
इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय, नगर विकास मंत्री, स्थानीय विधायक और गया जिला पदाधिकारी को भी भेजी गई है। फिलहाल नगर परिषद प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी।
इसे भी पढ़ें - बिहार कैबिनेट के बड़े फैसले: फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी से नए एयरपोर्ट तक, जमीन खरीद और योजनाओं पर करोड़ों की मंजूरी