न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पूजा शर्मा / पटना - पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर पटना में शनिवार को जानकी नवमी का पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्त माता सीता के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए।
हाईलाइट्स -
- पटना के महावीर मंदिर में जानकी नवमी पर उमड़ी भारी भीड़
- वैदिक विधि से माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना
- सीताराम विवाह-मूर्ति के समक्ष हुआ मुख्य अनुष्ठान
- पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण
- 24 घंटे का अष्टयाम कीर्तन शुरू, गूंजे भजन
विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान
इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। यजमान के रूप में पुजारी दिनदयाल उपस्थित रहे, जबकि विधिवत पूजा का संचालन पंडित जटेश झा ने किया। सीताराम की विवाह-मूर्ति के समक्ष माता सीता की विधि-विधान से पूजा की गई और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण गूंज उठा।
प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं में उत्साह
पूजा सम्पन्न होने के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करते हुए श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और संतोष झलकता दिखा। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बेहतर व्यवस्था की, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
जानकी नवमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जानकी नवमी माता सीता के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी के लगभग एक माह बाद आता है। मान्यता है कि मिथिला में राजा जनक द्वारा हल चलाने के दौरान माता सीता का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व है।
अष्टयाम कीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर
पूजा के उपरांत मंदिर में 24 घंटे का ‘अष्टयाम कीर्तन’ शुरू किया गया। भक्त लगातार भजन-कीर्तन के माध्यम से माता जानकी का गुणगान कर रहे हैं। “जनकसुता जग जननि जानकी…” जैसे भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। पंडित भवनाथ झा ने बताया कि धर्मशास्त्रों और वैष्णव परंपरा में इस पर्व का विशेष महत्व है।
वहीं श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने कहा कि मंदिर में हर पर्व तय परंपरा और कैलेंडर के अनुसार आयोजित किया जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी जानकी नवमी का आयोजन भव्य और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और धार्मिक उत्साह का संदेश दिया।
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