न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
हाइलाइट्स-
- CM सम्राट चौधरी ने दी लंबित ई चालानों पर बड़ी राहत
- लागू की गई एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना - 2026
- एकमुश्त ई चालान निपटान योजना के तहत। जमा करें चालान
- लंबित ई चालान जमा करने 50 प्रतिशत तक की राशि होगी माफ
- 90 दिनों से अधिक दिन के चालान का राष्ट्रीय लोक अदालत में होगा निष्पादन
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ल आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए लंबे समय से लंबित यातायात चालानों के निबटारे के लिए एक अहम और जनहितकारी फैसला लिया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026 को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत बिना हेलमेट, सीटबेल्ट, बिना इंश्योरेंस वाहन चलाने, प्रावधानों नियमों, विनियमों और अधिसूचनाओं का उल्लंघन सहित अन्य यातायात उल्लंघन से जुड़े लंबित ई-चालानों का 50 प्रतिशत राशि जमा कर आसानी से निपटान किया जा सकेगा। इससे आम लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी और पुराने चालानों से जुड़े झंझट से भी छुटकारा मिलेगा।
एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026 के तहत 90 दिनों से अधिक अवधि से लंबित चालानों का निष्पादन राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जाएगा । यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और वित्तीय वर्ष 2026-27 तक प्रभावी रहेगी। इस योजना से लाखों वाहन चालकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके लिए ई चालान की न्यूनतम जुर्माना राशि निर्धारित की गई है।
एकमुश्त निपटान योजना के माध्यम से लोग कम राशि देकर अपने पुराने मामलों का निपटारा कर सकेंगे, वहीं विभाग को भी राजस्व संग्रह में तेजी आएगी और लंबित मामलों का दबाव घटेगा। परिवहन विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाएं और यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक बनें।
इस योजना के लागू होने से आम लोगों को कई स्तर पर राहत मिलेगी। उन्हें पुराने सामान्य चालानों के लिए पूरी राशि चुकाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि लगभग आधी राशि देकर ही मामला समाप्त किया जा सकेगा। इसके अलावा, लंबित चालानों के कारण वाहन से जुड़े कार्यों में आने वाली बाधाएं भी दूर होंगी। वहीं, सरकार और परिवहन विभाग के लिए भी यह योजना कई मायनों में लाभकारी साबित होगी। इससे बड़ी संख्या में लंबित मामलों का त्वरित निपटान संभव होगा, राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।ढ़ावा मिलेगा।
इस पहल से इलाज तेज होगा, कागजी प्रक्रिया घटेगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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