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रांची/डेस्क: बिहार के दोनों गठबंधनों और पार्टियों में अब तक नूरा कुश्ती हो रही थी, लेकिन अब विधानसभा चुनाव में असल लड़ाई शुरू होने वाली है. दीपावली पर्व की समाप्ति के बाद अब बिहार छठ की तैयारियों में जुटा हुआ. राजनीतिक दल भी इस दौरान थोड़े शांत दिखेंगे, लेकिन उनकी सक्रियता बनी रहेगी. क्योंकि छठ महापर्व भी उनके लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का भी महा अवसर होगा. लेकिन इसके बाद पार्टियों, नेताओं, गठबंधनों के पास पहले चरण के चुनाव में जाने में ज्यादा समय नहीं बचेगा. यानी एक विरोधियों को चित करने के लिए अंतिम दांव चले जायेंगे.
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण और द्वितीय चरण के नामांकन की प्रक्रियाएं समाप्त हो चुकी हैं. पहले चरण में नाम वापसी की अंतिम तिथि पार होने के बाद चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े जारी कर दिये हैं. प्रथम चरण में 121 सीटों पर मतदान होने हैं. इनके लिए 1314 उम्मीदवार मैदान में है. बता दें कि प्रथम चरण में कुल 1690 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, लेकिन 350 नामांकन वैध नहीं पाये गये और उन्हें रद्द घोषित कर दिया गया. इनमें एनडीए की उम्मीदवार फिल्म अभिनेत्री और लोजपा-आर प्रत्याशी सीमा सिंह भी शामिल हैं.
लेकिन असल मुद्दा है महागठबंधन की परेशानी. महागठबंधन की परेशानी यह है कि आपसी लड़ाई के चक्कर में सीटों का बंटवारा तक नहीं कर पाये. जिसके कारण कहीं नामांकन ही न छूट जाये इस कारण महागठबंधन की उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी पसन्द की सीटें चुन कर खुद ही वहां खड़े हो गये. इसका नतीजा यह हुआ कि कई सीटों पर महागठबंधन के ही उम्मीदवार आमने-सामने आ गये. भले ही दूसरे चरण के नाम वापसी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद इसमें कुछ अंतर आ जाये, लेकिन ताजा स्थिति यही है कि 13 सीटों पर गठबंधन की लड़ाई एनडीए के साथ अपने ही 'साथियों' के साथ हो रही है. कहने को तो इसे कहा जा रहा है कि इन सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' होगी. लेकिन भला राजनीति में ऐसा होता है? अगर वाकई में ऐसा होता तो उन उम्मीदवारों, जिनके टिकट कट गये, को रोते हुए नहीं देखा जाता. खैर, सिकंदरा, कहलगांव, सुल्तानगंज, वैशाली, लालगंज, वारिसलीगंज, बछवाड़ा, करगहर, बिहार शरीफ और राजापाकड़ ऐसी सीटें हैं, जहां कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) या RJD आमने-सामने हैं.
कहां-कहां पर है 'फ्रेंडली फाइट'
- करगहर - महेंद्र गुप्ता (CPI) और संतोष मिश्रा (कांग्रेस)
- सुगौली - शशिभूषण सिंह (RJD) और मनोज सहनी (VIP)
- बिहारशरीफ - शिव प्रकाश यादव (CPI) और ओमैर खान (कांग्रेस)
- राजापाकर - मोहित पासवान (CPI) और प्रतिमा दास (कांग्रेस)
- बछवाड़ा - अवधेश राय (CPI) और गरीब दास (कांग्रेस)
- गौरा बौराम - अफजल अली (RJD) और संतोष सहनी (VIP)
- लालगंज - शिवानी शुक्ला (RJD) और आदित्य राजा (कांग्रेस)
- कहलगांव - रजनीश यादव (RJD) और प्रवीण कुशवाहा (कांग्रेस)
- सिकंदरा - उदय नारायण चौधरी (RJD) और विनोद चौधरी (कांग्रेस)
- वारिसलीगंज - अनिता देवी (RJD) और मंटन सिंह (कांग्रेस)
- वैशाली - अजय कुशवाहा (RJD) और संजीव कुमार (कांग्रेस)
- चैनपुर - बालगोविंद बिंद (VIP) और बृज किशोर बिंदु (RJD)
- झंझारपुर - राम नारायण यादव (CPI) और उम्मीदवार (VIP )
पहले चरण की 121 सीटों पर किसका पलड़ा है भारी?
बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में कुल 121 सीटों पर मतदान होना है. अगर इससे पहले हुए विधानसभा चुनाव की नजर से देखें तो महागठबंधन 2020 में एनडीए पर बढ़त बनाये हुए था. पिछले चुनाव के लिहाज से एक समीकरण भी थोड़ा बदला हुआ है. क्योंकि पिछले चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी एनडीए में थी और एलजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा था. 2025 में जिन 121 सीटों पर पहले चरण में मतदान हो रहा है, उनमें महागठबंधन को 61 सीटें मिली थीं जबकि एनडीए के खाते में 59 सीटें आयी थीं. आरजेडी ने सबसे ज्यादा 42, बीजेपी ने 32, जेडीयू ने 23, कांग्रेस ने 8 माले ने 7, वीआईपी ने 4, सीपीआई और सीपीएम ने 2-2 और एलजेपी ने 1 सीटें जीती थीं. इस बार जो पार्टियां जिस गठबंधन के साथ हैं, अगर उसके आधार पर इन 121 सीटों की बात करें तो आरजेडी 42, कांग्रेस 8, माले 7, वीआईपी 4, सीपीआई 2, सीपीएम 2 यानी कुल 65 सीटें गठबंधन के खातें की दिखाई दे रही हैं. वहीं बीजेपी 32, जेडीयू 23, और एलजेपी 1 की सीटों के आधार पर 56 सीटें एनडीए के खाते में दिख रही हैं. लेकिन इस बार महागठबंधन के अंदर ही जिस प्रकार का भूचाल मचा हुआ है, क्या उससे यह प्रदर्शन दोहरा पाना उसके लिए सम्भव होगा. दूसरी बात यह की इस बार एनडीए जिस रणनीति के साथ मैदान पर है, क्या उसके चक्रव्यूह को महागठबंधन भेद पायेगा. मगर इन सबके लिए 14 नवम्बर तक का इन्तजार करना होगा.
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