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पटना/डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए ही नहीं महागठबंधन में भी सीटों को लेकर रार मची हुई है. महागठबंन के लिए वामदल अच्छा खासा सिरदर्द साबित हो रहे हैं. वाम दल महागठबंधन में सीट शेयरिंग में समझौते राह को कठिन बना रहे है. वैसे देखा जाये तो विधानसभा चुनाव 2020 में अच्छी स्ट्राइक रेट से जीत हासिल करने वाले वाम दलों की मांग गलत नहीं है, फिर भी आरजेडी और कांग्रेस जैसे बड़ी पार्टियों के आगे उनकी मांग ज्यादा भी लग रही है. सीपीआई-ML ने जहां 30 की मांग की है, वहीं CPI 24 सीटों की मांग कर रहा है, जबकि CPM- को 11 सीटें चाहिए.
वाम दलों के सीटों की डिमांड पर अड़ जाने से राजद प्रमुख तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि तीनों दलों में से किसे मनाये और किसका हौसला बढ़ायें. तेजस्वी अगर एक दल की डिमांड पूरी करते हैं तो दूसरे के नाराज होने का डर रहेगा.
बता दें कि महागठबंधन में 2020 विधानसभा चुनाव में वाम दलों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था. सीपीआई-एमएल 19 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें उसने 12 पर जीत हासिल की थी. वहीं, सीपीआई 6 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 सीटें जीती थीं. सीपीआईएम ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 2 सीटें जीती थीं.इसी जीत से उत्साहित होकर ही वाम दलों ने अपनी डिमांड को बढ़ा दिया है.
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