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रांची/डेस्क: पस्क्गिम बंगाल की चर्चित आईपीएस अधिकारी दमयंती सें एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लंबे समय तक प्रशासनिक हाशिए पर रहने के बाद अब उन्हें राज्य की कानून व्यवस्था से जुड़े एक अहम आयोग में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमावर को ऐलान किया कि दमयंती सेन को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों की जांच के लिए गठित विशेष आयोग का 'मेंबर सेक्रेटरी' बनाया गया हैं.
यह आयोग पिछले 15 वर्षों के दौरान राज्य में महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुए कथित अत्याचारों और अपराधों की जांच करेगा. सरकार का कहना है कि आयोग संवेदनशील मामलों की निष्पक्ष समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियों से जवाब भी मांगेगा.
पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस से मिली थी पहचान
दमयंती सें 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी है और उन्हें कोलकाता पुलिस की पहली महिला ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) बनने का गौरव हासिल हैं. साल 2012 में कोलकाता के चर्चित पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच के दौरान वह पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गई थी. 6 फरवरी 2012 को पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला के साथ चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी. उस समय राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को सरकार को बदनाम करने की साजिश बताते हुए “मनगढ़ंत कहानी” कहा था. हालांकि, दमयंती सेन की अगुवाई में पुलिस टीम ने तेजी से जांच करते हुए कुछ ही दिनों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. जांच में यह साफ हो गया कि पीड़िता के साथ अपराध वास्तव में हुआ था. इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी.
सच सामने आने के बाद हुआ तबादला
पार्क स्ट्रीट केस सुलझाने के तुरंत बाद दमयंती सेन का तबादला लालबाजार क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया था. उस समय सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया था, लेकिन विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने दावा किया कि सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग जाकर सच्चाई सामने लाने की वजह से उन्हें किनारे किया गया. इसके बाद लंबे समय तक उन्हें कोई बड़ी फील्ड पोस्टिंग या प्रभावशाली जिम्मेदारी नहीं दी गई. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि दमयंती सेन को प्रशासनिक तौर पर साइडलाइन कर दिया गया था.
भले ही राजनीतिक स्तर पर उन्हें ज्यादा महत्व नहीं मिला, लेकिन प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में उनकी छवि एक ईमानदार और सख्त अधिकारी की रही. साल 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन पर भरोसा जताते हुए राज्य के चार रेप मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. इसके बाद 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) के पद पर नियुक्त किया गया. अब नई सरकार द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण आयोग में शामिल किए जाने को उनकी प्रशासनिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा हैं.
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