न्यूज11 भारत / पटना डेस्क: बिहार की सियासत में एक बहुत बड़ा उलट फेर होने वाला है। पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति की धुरी बने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब सूबे की सत्ता को अलविदा कहने का मन बना लिया है। 2005 से बिहार का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार अब दिल्ली की ओर रुख करेंगे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस खबर पर मुहर लगाते हुए बताया है कि नीतीश कुमार आगामी 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक, सभी को हैरान कर दिया है।
दो दशक लंबे सफर का पड़ाव
साल 2005 से बिहार की बागडोर संभालने वाले नीतीश कुमार के शासनकाल को 'सुशासन' के दौर के रूप में देखा जाता है। मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा जाने का उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक लंबे युग के समापन के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बिहार को अपना नया मुख्यमंत्री मिलना तय है, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति पूरी तरह से बदलने वाली है। सबकी निगाहें अब एनडीए (NDA) के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे बिहार की कमान किसके हाथों में सौंपते हैं।
बिहार के तीन दिग्गज ऊपरी सदन में
इस बार राज्यसभा चुनाव के नतीजे बेहद दिलचस्प रहे हैं। न केवल Nitish Kumar , बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी निर्वाचित हुए हैं। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार का भी ऊपरी सदन में जाना यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार में बिहार का सियासी वजन अब काफी बढ़ गया है। एक साथ तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का राज्यसभा पहुंचना केंद्र में बिहार की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
उत्तराधिकारी कौन? पटना की गलियों में पोस्टरों की जंग
Nitish Kumar Bihar के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ ही राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि अबकी बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है। वहीं, सत्ता के गलियारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उत्तराधिकारी बनाए जाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। पटना की सड़कों पर उनके समर्थन में लगे पोस्टर इस ओर इशारा कर रहे हैं कि कार्यकर्ताओं में बदलाव को लेकर हलचल है।
हालांकि, NDA का केंद्रीय नेतृत्व और नीतीश कुमार की सहमति के बाद ही नए नाम का आधिकारिक ऐलान होगा। अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, जो राज्य के भविष्य की नई दिशा तय करेंगे।
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