न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार में कथित कुशासन और विकास की चुनौतियों को लेकर आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस कार्यक्रम में राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल, बक्सर सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी मौजूद रहे।
हाईलाइट्स -
- राजद की एक दिवसीय परिचर्चा में केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला
- सुधाकर सिंह ने बिहार के पिछड़ेपन और आर्थिक नीतियों पर उठाए सवाल
- वित्त आयोग और संसाधन वितरण नीति को लेकर केंद्र पर गंभीर आरोप
- सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा उठाया
- राज्यों की स्वायत्तता कमजोर करने का आरोप
बिहार के पिछड़ेपन के कई कारण: सुधाकर सिंह
परिचर्चा को संबोधित करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार के पिछड़ेपन के कई कारण हैं और राज्य की अपनी संरचनात्मक समस्याएं भी हैं, जिनके चलते यहां की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वित्तीय संसाधनों के बंटवारे को लेकर कोई स्पष्ट और प्रभावी नीति नहीं बनाई गई है।
वित्तीय बंटवारे पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि पहले यह व्यवस्था थी कि केंद्र सरकार जरूरी खर्चों का आकलन कर राज्यों को उनका हिस्सा देगी, लेकिन Finance Commission ने इसे सही ढंग से रेखांकित नहीं किया। इसके चलते संघीय ढांचे के तहत राज्यों को मिलने वाले अधिकार और संसाधन प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चिंता
सुधाकर सिंह ने शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बढ़ते खर्चों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र की मौजूदा नीतियां इन जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर राजस्व की वसूली की जा रही है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है और राज्यों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है।
औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप
औद्योगिक विकास के मुद्दे पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग लगाने की बातें की गईं, लेकिन इसका लाभ कुछ चुनिंदा राज्यों, खासकर गुजरात, को मिला। इससे क्षेत्रीय असंतुलन और बढ़ा है।
राज्यों की स्वायत्तता पर खतरे की बात
परिचर्चा में मौजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दबाव बनाकर नीतियों को लागू कर रही है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। साथ ही, उन्होंने बिहार के समग्र विकास के लिए पारदर्शी और न्यायसंगत नीतियां बनाने की मांग की।
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