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रांची/डेस्क: धर्म-संस्कृति की जहां गंगा बहती है उस बिहार की राजधानी पटना के समीप बिहटा के कंचनपुर में एक करीब 400 साल पुराना वन देवी का मंदिर है. इस मंदिर की मान्यताएं काफी अनोखी हैं. इस मंदिर का रहस्य कुछ ऐसा है कि इससे प्रेरित होकर अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री तमन्ना भाटिया अभिनीत 'द वन' भी बन कर सिनेमा घरों में पहुंच गई है और दर्शकों को रोमांचित कर रही है.
इस प्राचीन 'वन देवी मंदिर' सबसे अनोखी और रहस्यमयी परम्परा यह है कि सूर्यास्त होते ही जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और इसके आसपास के जंगल में कोई आता-जाता भी नहीं है. मान्यता है कि रात्रि होने के बाद वन देवी इस वन में विचरण करती हैं और जंगल में रहने वाले जीव-जंतुओं की रक्षा करती हैं. यही वजह है कि देवी की पूजा भई जीव-जंतुओं की रक्षक के रूप में में की जाती है. इस मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक पिंड स्थापित है जिसकी देवी मान कर आराधना की जाती है.
मंदिन के निर्माण के बारे में बताया जाता है कि इसकी स्थापना 1600 ईस्वी के आसपास राघोपुर के विद्यानंद मिश्र की प्रेरणा से इस मंदिर की स्थापना हुई थी. विद्यानंद मिश्रा मां विंध्यवासिनी के परम भक्त थे, वह हर नवरात्रि पैदल विंध्याचल जाते थे. एक बार देवी ने सपने में उन्हें गंगा जल और गंगा की मिट्टी से पिंड बनाकर जंगल में स्थापित कर पूजा करने का आदेश दिया. विद्यानंद मिश्र द्वारा स्थापित पिंड ही वन देवी के रूप में आज प्रचलित है. देवी का नाम वन देवी इसलिए पड़ा, क्योंकि जिस समय मंदिर स्थापित हुआ था तब यह इलाका पूरी तरह से वन से आच्छादित था.
वन देवी मंदिर की अन्य मान्यताएं
कहा जाता है कि मंदिर के गर्भगृह में कभी ताला नहीं लगता, मंदिर के कपाट जब बंद करने होते हैं तब सिर्फ चुनरी से दरवाजा बांध दिया जाता है. यहां आज तक चोरी नहीं हुई.
सूर्यास्त के बाद मां खुद मंदिर में विचरण करती हैं. इसलिए मंदिर में और आसपास कोई नहीं रुकता. यहां तक कि मंदिर के पुजारी भी चले जाते हैं.
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है और मन्नत पूरी होने पर लोग चुनरी बांधने आते हैं.