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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने दहेज में पंप सेट की मांग और महिला को प्रताड़ित करने के मामले में आरोपी पति राजेंद्र चौधरी की सजा बरकरार रखी है. न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने उसकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के नौ साल के कठोर कारावास की सजा को कायम रखा है. हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने दहेज मृत्यु से जुड़े जरूरी तथ्यों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित किया है.
1999 में हुई थी महिला की मौत
मामला जरमुंडी थाना कांड संख्या 173/1999 से जुड़ा है. मृतका चंद्रिका देवी की शादी वर्ष 1997 में बासुकीनाथ मंदिर में राजेंद्र चौधरी के साथ हुई थी. शादी के करीब दो साल बाद पति और ससुर की ओर से सिंचाई के लिए पंप सेट की मांग की जाने लगी. मांग पूरी नहीं होने पर चंद्रिका के साथ मारपीट और प्रताड़ना किए जाने का आरोप था.
30 दिसंबर 1999 की रात गांव के कुछ लोगों ने मृतका के परिजनों को सूचना दी कि चंद्रिका की अचानक मौत हो गई है. परिजन जब उसके ससुराल पहुंचे तो उसका शव घर के सामने पड़ा था. उसके मुंह और नाक से झाग निकल रहा था. ससुराल पक्ष ने बताया था कि वह खेत से लौटने के बाद कांपने लगी और बेहोश हो गई, जिसके बाद इलाज के लिए ले जाते समय उसकी मौत हो गई.
पंप सेट की मांग को लेकर प्रताड़ना की गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के भाई, चचेरे भाई और पिता समेत कई गवाहों ने पंप सेट की मांग और मांग पूरी नहीं होने पर चंद्रिका को प्रताड़ित किए जाने की बात कही. हाईकोर्ट ने पाया कि इन गवाहों की गवाही में इस संबंध में पर्याप्त समानता थी. मृतका के पिता ने भी अदालत को बताया कि उनकी बेटी ने घटना से पहले पति द्वारा पंप सेट मांगने और मारपीट किए जाने की बात बताई थी. उन्होंने अपनी बेटी की मौत के लिए आरोपी पति और उसके परिवार को जिम्मेदार माना था.
पोस्टमार्टम में मौत का स्पष्ट कारण नहीं मिला
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने शरीर पर किसी तरह की चोट नहीं पाई. पेट में करीब 50 एमएल पीले रंग का पदार्थ मिला था. डॉक्टर ने मौत का निश्चित कारण बताने में असमर्थता जताई और जांच के लिए शरीर के कुछ अंगों को सुरक्षित रखा. हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के अन्य साक्ष्यों के आधार पर माना कि महिला की मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई थी.
हाईकोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामले में अभियोजन को यह साबित करना होता है कि महिला की मौत सामान्य परिस्थितियों के अलावा हुई, शादी के सात साल के भीतर हुई और मौत से पहले उसे दहेज की मांग को लेकर पति या ससुराल वालों की ओर से प्रताड़ित किया गया. अदालत ने माना कि इस मामले में ये जरूरी तथ्य साबित हुए हैं.
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी गलती नहीं पाई और राजेंद्र चौधरी की दोषसिद्धि तथा नौ साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी. अदालत ने उसकी पहले निलंबित की गई सजा भी रद्द कर दी और उसे दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर बाकी सजा पूरी करने का निर्देश दिया है.
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