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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गांदके गांव में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने जमीन मालिकों को मिलने वाले मुआवजे की दर 3,740 रुपये प्रति डिसमिल से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल कर दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के समय बाजार मूल्य तय करने की प्रक्रिया में संबंधित प्राधिकारी ने कानून के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया था. न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने गांदके गांव की जमीन से जुड़े कई फर्स्ट अपील मामलों को स्वीकार करते हुए मुआवजे की दर बढ़ाने का आदेश दिया.
2019 में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी
मामला नेशनल हाईवे नंबर 23 के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए गांदके गांव की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है. जमीन अधिग्रहण के लिए 1 जुलाई 2019 को अधिसूचना जारी की गई थी. इसके बाद 18 फरवरी 2020 को घोषणा जारी की गई. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने जमीन के लिए 3,740 रुपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा तय किया था. जमीन मालिकों ने इस दर पर आपत्ति जताते हुए अधिक मुआवजे की मांग की और मामला रेफर होकर अदालत पहुंचा.
जिला अदालत ने 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल किया था मुआवजा
मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान जिला जज-सह-LARRA कोर्ट ने मुआवजे की दर को बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति डिसमिल कर दिया था. जमीन मालिक इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की. राज्य की ओर से यह दलील भी दी गई कि जमीन मालिक मुआवजे की राशि बिना आपत्ति स्वीकार कर चुके थे. हाईकोर्ट ने इस दलील को रिकॉर्ड के आधार पर स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने पाया कि मुआवजा स्वीकार करने के नोटिस के बाद जमीन मालिकों ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई थी.
हाईवे से सटी जमीन की लोकेशन को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने पाया कि गांदके गांव की जमीन नेशनल हाईवे के बिल्कुल किनारे है. कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, गांदके और कंकेबार गांव आपस में सटे हुए हैं. जमीन मालिकों की ओर से गवाही में बताया गया कि गांदके गांव रामगढ़ शहर से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है और वहां सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल और कॉलेज जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि इलाके में तेजी से शहरीकरण हो रहा है.
बाजार दर तय करने में भू-अर्जन पदाधिकारी से चूक
हाईकोर्ट ने कहा कि जब गांदके गांव में संबंधित अवधि के बिक्री विलेख उपलब्ध नहीं थे, तब 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26 के तहत नजदीकी गांव में समान प्रकृति की जमीन की बिक्री दर को भी देखा जाना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने गांदके गांव में बिक्री विलेख उपलब्ध नहीं होने की बात दर्ज करने के बावजूद नजदीकी गांव की जमीन की बाजार दर पता करने का प्रयास नहीं किया. अदालत के अनुसार, कानून के तहत ऐसी स्थिति में नजदीकी गांव या आसपास के क्षेत्र की समान प्रकृति की जमीन के बिक्री मूल्य पर भी विचार करना जरूरी था.
कंकेबार की जमीन की बिक्री को माना गया प्रासंगिक
अदालत ने रिकॉर्ड पर पेश किए गए सात बिक्री विलेखों की जांच की. इनमें कुछ कंकेबार और कुछ मुरामकला गांव के थे. कोर्ट ने कहा कि गांदके से कंकेबार सटा हुआ और सबसे नजदीकी गांव साबित हुआ है. इसलिए धारा 26 के तहत कंकेबार के बिक्री विलेखों पर विचार किया जा सकता है. वहीं मुरामकला गांव को गांदके का निकटवर्ती गांव साबित नहीं किया जा सका, इसलिए वहां के बिक्री विलेखों को बाजार दर तय करने में शामिल नहीं किया गया.
99,300 रुपये प्रति डिसमिल की दर तय
कोर्ट ने कंकेबार के बिक्री विलेखों में से केवल उस बिक्री विलेख को निर्धारित अवधि में योग्य माना, जिसकी तारीख 14 जुलाई 2017 थी. इस बिक्री में 6¼ डिसमिल जमीन 6,20,625 रुपये में बेची गई थी. इसके हिसाब से जमीन की दर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल आती है.
अदालत ने यह भी माना कि गांदके में अधिग्रहित जमीन की लोकेशन कंकेबार के इस बिक्री विलेख वाली जमीन से बेहतर थी. अधिग्रहित जमीन के कई हिस्सों में दो से तीन तरफ सड़क थी और एक तरफ नेशनल हाईवे था. इसलिए जमीन की लोकेशन का फायदा भी महत्वपूर्ण था.
हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने का दिया आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मुआवजा बढ़ाते समय उपलब्ध बिक्री विलेखों पर सही तरीके से विचार नहीं किया. अदालत ने माना कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26 के अनुरूप बाजार मूल्य तय नहीं किया गया था.
इसके बाद हाईकोर्ट ने मुआवजे की दर 11,000 रुपये प्रति डिसमिल से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल कर दी. यानी जिला भू-अर्जन पदाधिकारी की शुरुआती दर 3,740 रुपये प्रति डिसमिल की तुलना में मुआवजा काफी बढ़ गया. अदालत ने सभी अपीलों को स्वीकार करते हुए जमीन मालिकों को बढ़ी हुई दर पर 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ देने का भी निर्देश दिया है. हाईकोर्ट का फैसला: गांदके गांव में अधिग्रहित जमीन के लिए मुआवजे की नई दर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल होगी.