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CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है.

By : Ark Sahuliyar
CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

न्यूज11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है. अदालत ने कानूनी और मानवीय पहलुओं को जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि यदि नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट (NCWA-XI) की प्रभावी अवधि के भीतर नियमों में आवश्यक संशोधन कर 'अविवाहित बहन' को भी आश्रित की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है, तो वह अनुकंपा नियुक्ति पाने की पूरी हकदार है. न्यायाधीश दीपक रोशन की एकल पीठ ने सीसीएल प्रबंधन द्वारा नौकरी की अर्जी को बार-बार खारिज करने वाले आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही, माननीय अदालत ने गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला देते हुए सीसीएल को निर्देश दिया है कि वे युवती को छह सप्ताह के भीतर हर हाल में नियुक्ति पत्र जारी करें. 

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला रामगढ़ जिले के कुजू कॉलोनी की रहने वाली अनीता देवी और उनकी बेटी स्मृति कुमारी के जीवन संघर्ष से जुड़ा हुआ है. अनीता देवी के बेटे अंशु उरांव सीसीएल के हजारीबाग क्षेत्र (चरही) में बतौर कर्मचारी कार्यरत थे, जिनका सेवाकाल के दौरान ही 3 अगस्त 2023 को असमय निधन हो गया था. घर के इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में डूब गया. इस विकट स्थिति से उबरने और अपनी बेटी स्मृति कुमारी के भविष्य व आजीविका को सुरक्षित करने के लिए मां अनीता देवी ने अपनी बेटी (जो कि मृतक की अविवाहित बहन है) को अनुकंपा पर नौकरी देने की गुहार लगाते हुए सीसीएल प्रबंधन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था. 

CCL ने खारिज कर दिया था आवेदन
हालांकि, इस संवेदनशील मामले में सीसीएल प्रबंधन का रवैया बेहद उदासीन रहा और प्रबंधन ने नियमों की तकनीकी पेचीदगियों का हवाला देते हुए शुरुआत में 22 मई 2024 को यह आवेदन खारिज कर दिया कि तत्कालीन NCWA-XI के प्रावधानों के तहत अविवाहित बहन को 'प्रत्यक्ष आश्रित' नहीं माना जा सकता. इस रिजेक्शन के कुछ ही दिनों बाद 11 जून 2024 को जेबीसीसीआई (JBCCI) की मानकीकरण समिति ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए नियमों में बड़ा संशोधन किया, जिसके तहत मृत कोयला कर्मियों की 'अविवाहित बहन' को भी अप्रत्यक्ष आश्रितों की श्रेणी में शामिल कर नौकरी का अधिकार दे दिया गया. नए नियमों के लागू होने के तत्काल बाद मां अनीता देवी ने 18 जून 2024 को दोबारा अपनी बेटी की नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन सीसीएल प्रबंधन ने इस बार भी संवेदनहीनता दिखाते हुए यह तर्क देकर दावा खारिज कर दिया कि चूंकि कर्मचारी की मौत जून 2024 के इस संशोधन से पहले (अगस्त 2023 में) हुई थी, इसलिए इस बदले हुए नियम का लाभ बैकडेट से नहीं दिया जा सकता. 

अविवाहित बहन को इस लाभ से वंचित करना गलत
प्रबंधन के इस अड़ियल रुख के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायाधीश दीपक रोशन की पीठ ने सीसीएल के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए पीड़ित परिवार के पक्ष में व्यवस्था दी. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियमों के मुताबिक कर्मचारी की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने हेतु 18 महीने की समय सीमा निर्धारित है, और इस मामले में संशोधन लागू होने के मात्र सात दिनों के भीतर किया गया आवेदन पूरी तरह से इस तय समय सीमा के अंतर्गत आता है. हाई कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि भले ही यह नया सर्कुलर 11 जून 2024 से भविष्यलक्षी (Prospectively) प्रभाव से लागू हुआ हो, लेकिन यह वर्तमान में चल रहे NCWA-XI (जो वर्ष 2021 से 2026 तक के लिए प्रभावी है) की तय समयावधि के बीच में ही आया है और इसी एग्रीमेंट का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. अदालत ने फैसला सुनाया कि जब आवेदन तय समय सीमा के भीतर है और नियम भी उसी एग्रीमेंट चक्र का हिस्सा है, तो मृतक की अविवाहित बहन को इस लाभ से वंचित करना कानून की नजर में पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है, इसलिए स्मृति कुमारी को तुरंत नियुक्ति पत्र सौंपकर कार्यभार दिया जाए.

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