न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: रांची स्थित झारखंड के एकमात्र सरकारी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रिनपास (RINPAS) में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ओपीडी के दौरान दो वरिष्ठ मनोचिकित्सकों के बीच विवाद मारपीट और तीखी नोकझोंक में बदल गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक ओपीडी परिसर तनावपूर्ण माहौल में तब्दील रहा, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन स्तब्ध रह गए. आरोप है कि वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जे.के. सोलंकी ने डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा के साथ मारपीट की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी भी दी. घटना दोपहर लगभग एक बजे की बताई जा रही है.
बीच-बचाव करने वाले चिकित्सकों से भी हुई कथित धक्का-मुक्की
मामला बढ़ता देख संस्थान के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रविंद्र उरांव और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया. आरोप है कि इस दौरान डॉ. सोलंकी ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की की और अभद्र व्यवहार किया. स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचे सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन काफी देर तक माहौल सामान्य नहीं हो सका. इस पूरी घटना के दौरान ओपीडी में मौजूद सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों ने चिकित्सकों के बीच हुए इस विवाद को अपनी आंखों से देखा, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना, प्रशासनिक हस्तक्षेप पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, ओपीडी में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है. हालांकि, घटना के दौरान संस्थान की प्रभारी निदेशक सहित कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि उस समय प्रभारी निदेशक अपने कार्यालय में मौजूद थीं और उनके कक्ष से संस्थान के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी संभव है. घटना के बाद डॉ. जे.के. सोलंकी ने प्रभारी निदेशक से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा. वहीं डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा ने ईमेल के माध्यम से लिखित शिकायत भेजते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने ओपीडी के दौरान सुरक्षा के लिए दो गार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी की है. इस मामले में डॉ. सोलंकी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
पुराने विवाद से जुड़ रहा है ताजा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई को डॉक्टर्स डे कार्यक्रम के दौरान एक निजी ज्वेलरी कंपनी द्वारा चिकित्सकों का सम्मान और अपने उत्पादों का प्रचार-प्रसार संस्थान के निदेशक कक्ष में किया गया था. इस कार्यक्रम में चिकित्सकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए थे. बताया जा रहा है कि उस कार्यक्रम का वीडियो डॉ. सोलंकी ने रिकॉर्ड किया था. उनका आरोप है कि यह वीडियो मीडिया तक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा के माध्यम से पहुंचा. इसके अलावा, डॉ. सोलंकी ने कथित तौर पर वॉयस मैसेज भेजकर डॉ. सिद्धार्थ पर प्रभारी निदेशक से असंतोष रखने और पूर्व निदेशक डॉ. सुभाष सोरेन के संपर्क में रहने का भी आरोप लगाया था.
गुटबाजी और स्थायी निदेशक की कमी पर फिर उठे सवाल
सस्थान के भीतर वीडियो लीक प्रकरण को लेकर पहले से ही तनाव का माहौल बताया जा रहा है. कर्मचारियों और चिकित्सकों के बीच बढ़ती गुटबाजी की चर्चा भी लगातार हो रही है. इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होने और प्रशासनिक नेतृत्व की कमी को लेकर सवाल तेज हो गए हैं. कई लोगों का मानना है कि नेतृत्व के अभाव का असर संस्थान की कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है.