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रांची/डेस्क: बोकारो जिले के दुग्धा थाना क्षेत्र के रहने वाले रितेश कुमार के करीब तीन वर्षों से लापता होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जांच की प्रगति पर विस्तृत शपथ-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने टिप्पणी की कि इतने लंबे समय के बाद भी युवक का कोई सुराग नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है.
न्यायाधीश रोंगोन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दुग्धा थाना कांड संख्या 58/2023 के अनुसंधान पदाधिकारी स्वयं उपस्थित हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए इस पहलू की जांच की गई थी कि रितेश कुमार का इंस्टाग्राम अकाउंट 29 जुलाई 2025 तक सक्रिय था. हालांकि इंस्टाग्राम से प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक के लापता होने के बाद उसके अकाउंट पर किसी भी तरह की गतिविधि दर्ज नहीं हुई.
अनुसंधान पदाधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि मामले के हर संभावित पहलू की जांच की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2023 से लंबित इस मामले की जांच अब और अधिक गंभीरता और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी.
केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि अब तक जांच के प्रयास जरूर किए गए हैं, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद युवक का पता नहीं चलना बेहद गंभीर मामला है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाए.
27 अगस्त को होगी मामले की अगली सुनवाई
याचिकाकर्ता संतोष साव ने अपने पुत्र रितेश कुमार के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले में निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है. उनकी ओर से अधिवक्ता शियाकुर रहमान और वाजिद अली ने पक्ष रखा. अधिवक्ताओं ने दलील दी कि तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद युवक का कोई पता नहीं चलना जांच की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. न्यायहित में और पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के लिए मामले की गहन और परिणामोन्मुख जांच आवश्यक है.