संतोष कुमार/न्यूज11 भारत
सरायकेला/डेस्क: सरायकेला-खरसावाँ. भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित “विभागीय शिखर सम्मेलन” के संदर्भ में समाहरणालय सभागार में आज उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परामर्श (District Level Consultation Meeting) आयोजित की गई. बैठक में पेयजल स्रोतों की स्थिरता, ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं संधारण, जल संरक्षण तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत समीक्षा की गई.
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने कहा कि जिले में संचालित सभी पेयजल योजनाओं, खराब चापाकलों एवं जलमीनारों की समयबद्ध मरम्मत एवं रियल टाइम रिपेयरिंग सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर कार्य किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति बाधित न हो. उन्होंने विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजनाओं के संचालन, अनुरक्षण एवं आवश्यक मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं जल संचयन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. लगातार भू-जल स्तर नीचे जाने से पेयजल योजनाओं के साथ-साथ कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए जहाँ जल पुनर्भरण की आवश्यकता है तथा मनरेगा, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग सहित संबंधित विभागों के समन्वय से जल संरक्षण एवं जल संचयन से जुड़ी योजनाओं का चयन एवं निर्माण कार्य सुनिश्चित किया जाए.
बैठक में निर्देश दिया गया कि जल संरक्षण एवं जल संचयन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते हुए व्यापक जागरूकता अभियान संचालित करें. विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए लोगों को वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए.
उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि जिला स्तर पर गठित तकनीकी टीम द्वारा पेयजल योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए. खराब गुणवत्ता वाले पानी, अनियमित जलापूर्ति एवं अन्य तकनीकी समस्याओं की जांच कर उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए. साथ ही निर्धारित अंतराल पर पेयजल की गुणवत्ता एवं समयबद्ध जलापूर्ति की जांच भी नियमित रूप से की जाए.
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिले में संचालित सभी पेयजल परिसंपत्तियों का जिला स्तरीय गठित टीम एवं संबंधित समितियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाए तथा योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण पर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि योजनाएं दीर्घकाल तक सुचारू रूप से संचालित होती रहें.
ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका को सुदृढ़ करने पर बल देते हुए निर्देश दिया गया कि प्रत्येक समिति की प्रतिमाह बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए. योजनाओं के रखरखाव एवं संचालन के लिए ग्राम स्तर पर उचित जल कर की दर निर्धारित कर सभी हैंडओवर योजनाओं में नियमित जल कर संग्रहण सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजनाओं के अनुरक्षण हेतु स्थानीय स्तर पर संसाधन उपलब्ध हो सकें.
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने कहा कि सरकार की पेयजल एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं आम जनता की सुविधा एवं हित के लिए संचालित की जाती हैं, किंतु कई स्थानों पर मोटर चोरी, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त करना, नल एवं अन्य उपकरणों की चोरी जैसी घटनाओं से योजनाएं प्रभावित होती हैं. इससे न केवल योजनाओं का संचालन बाधित होता है, बल्कि ग्रामीणों को नियमित पेयजलापूर्ति में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने संबंधित विभागों एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को निर्देश दिया कि स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर लोगों को इन योजनाओं की सुरक्षा, संरक्षण एवं रखरखाव के प्रति जागरूक करें तथा नियमित मरम्मत एवं अनुरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाकर प्रभावी ढंग से कार्य करें.
बैठक में कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, जिला कृषि पदाधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, सभी कनीय अभियन्ता ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति से जुड़े सदस्य एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे.