राजन पाण्डेय/न्यूज11 भारत
गुमला/डेस्क: जब सरकार और जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तो आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता बचती है. कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है चैनपुर प्रखंड की रामपुर पंचायत के राजस्व ग्राम भटौली के ग्रामीणों ने. भीषण गर्मी और जल संकट से त्रस्त ग्रामीणों ने किसी सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद कमर कसी और खजूर ढोंढा पर श्रमदान कर 20 फीट लंबे बोरी बांध का निर्माण कर दिया.
वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण इलाके के जलस्रोत सूख चुके थे. स्थिति इतनी विकट थी कि बैल, बकरी और अन्य मवेशियों के लिए पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया था. इस समस्या को देखते हुए फिया फाउंडेशन की कार्यकर्ता रजनी केरकेट्टा ने ग्राम सभा के साथ बैठक की. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार के भरोसे बैठने के बजाय श्रमदान से बांध बनाया जाए.ग्राम प्रधान राजेश बैगा ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है.
उन्होंने बताया हमने इस नाले पर बांध निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. विधायक भूषण तिर्की को भी गुहार लगाई गई थी, लेकिन उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यहाँ उनका कोई वोटर नहीं है. प्रशासन की इसी बेरुखी से तंग आकर अंततः ग्रामीणों ने खुद पहल करने का फैसला लिया.निर्णय होते ही पूरा गांव एकजुट हो गया. ग्रामीण अपने घरों से खाली बोरे, कुदाल और तगाड़ी लेकर नदी की ओर निकल पड़े. देखते ही देखते बोरियों में बालू भरकर नाले के प्रवाह को रोका गया. 20 फीट लंबे इस बांध के बनते ही पानी का जमाव शुरू हो गया है.
उम्मीद जताई जा रही है कि एक रात में ही नाला लबालब भर जाएगा, जिससे लगभग 30 एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकेगी.मवेशियों के लिए पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था होगी.ग्रामीणों को नहाने-धोने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.मौके पर मौजूद फिया फाउंडेशन के प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो ने ग्रामीणों के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि हर काम के लिए सरकार का मुंह ताकना समझदारी नहीं है.
यदि ग्राम सभा सशक्त हो और ग्रामीण एकजुट रहें, तो बड़े से बड़े काम को श्रमदान से अंजाम दिया जा सकता है.इस सामूहिक कार्य में ग्राम प्रधान राजेश बैगा, मनीष लोहार, देवंती देवी, जितेंद्र रतिया, सुखदेव रतिया, अंजनी देवी, शुकर्मानी देवी, सुषमा देवी, नीलम देवी समेत फिया फाउंडेशन की रजनी केरकेट्टा और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे.
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