सिस्टम फेल

बरवाडीह की ‘लाइफलाइन’ सड़क पर सिस्टम की 'मौत'! चार दिन से आवागमन ठप, मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार भी मुश्किल

चार दिन बीत जाने के बावजूद सड़क को चालू कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
बरवाडीह की ‘लाइफलाइन’ सड़क पर सिस्टम की 'मौत'! चार दिन से आवागमन ठप, मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार भी मुश्किल

प्रमोद कुमार/न्यूज़11भारत

बरवाडीह/डेस्क: बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर आदर्शनगर स्थित मुक्ति धाम के पास सड़क बह जाने के चार दिन बाद भी आवागमन बहाल नहीं हो सका है. लगातार बारिश के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे आदर्शनगर, बरवाडीह बाजार, भगत सिंह चौक, लुहुरपैरा, उकामाड़, कुचिला, छिपादोहर समेत दर्जनों गांवों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क क्षेत्र के लिए लाइफलाइन है, लेकिन चार दिन बीत जाने के बावजूद सड़क को चालू कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है.

 मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार करना भी हुआ मुश्किल 

सड़क क्षतिग्रस्त होने का सबसे गंभीर असर आदर्शनगर स्थित मुक्ति धाम पर पड़ा है. मुक्ति धाम में शव जलाने वाला स्थान भी बारिश और तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया है. इसके अलावा परिसर में भारी मात्रा में मिट्टी, पानी, झाड़ियां और मलबा जमा हो गया है. ऐसे में शव के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिजनों और ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, अंतिम यात्रा के दौरान शव को मुक्ति धाम तक पहुंचाना ही मुश्किल हो गया है और वहां पहुंचने के बाद दाह संस्कार के लिए उचित स्थान की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी और बढ़ जा रही है. लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील और जरूरी व्यवस्था का इस तरह बाधित होना बेहद चिंताजनक है.

मरीजों और आपात स्थिति को लेकर भी बढ़ी चिंता 

सड़क बंद रहने से ग्रामीणों को मरीजों और अन्य आपात परिस्थितियों की भी चिंता सताने लगी है. यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़े या किसी प्रकार की गंभीर घटना हो जाए, तो क्षतिग्रस्त सड़क के कारण समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल हो सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था कराने की मांग की है.

चार दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बहने की जानकारी के बावजूद चार दिन से स्थिति जस की तस बनी हुई है. लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क बहना प्राकृतिक आपदा हो सकती है, लेकिन उसके बाद भी लगातार कई दिनों तक आवागमन बाधित रहना और मुक्ति धाम की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है.

 ग्रामीणों की दो टूक—आश्वासन नहीं, मौके पर काम चाहिए 

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल स्थल निरीक्षण कर सड़क की मरम्मत कराने, आवागमन बहाल करने तथा मुक्ति धाम में दाह संस्कार के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान तैयार कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर काम शुरू होते हुए दिखना चाहिए. सड़क जल्द बहाल नहीं हुई तो दर्जनों गांवों के लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है.

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