JSCA स्टेडियम भगदड़

JSCA स्टेडियम की भगदड़ केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि कुप्रबंधन और लापरवाही का परिणाम : दीपक प्रकाश 

यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि आयोजन समिति, JSCA प्रबंधन एवं राज्य सरकार की घोर लापरवाही तथा कुप्रबंधन का परिणाम है: दीपक प्रकाश

By : Ark Sahuliyar
JSCA स्टेडियम की भगदड़ केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि कुप्रबंधन और लापरवाही का परिणाम : दीपक प्रकाश 

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद दीपक प्रकाश ने 23 जून 2026 को राँची स्थित JSCA स्टेडियम में जेपीएल फाइनल के दौरान हुई भगदड़ की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि आयोजन समिति, JSCA प्रबंधन एवं राज्य सरकार की घोर लापरवाही तथा कुप्रबंधन का परिणाम है. उन्होंने कहा कि जब आयोजनकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया गया, मुफ्त प्रवेश की व्यवस्था रखी गई तथा बड़ी संख्या में दर्शकों के आने की संभावना पहले से थी, तब सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई ? आखिर किसके निर्देश पर सीमित प्रवेश द्वार खोले गए ? पर्याप्त पुलिस बल, मजिस्ट्रेट, बैरिकेडिंग और आपातकालीन व्यवस्था क्यों नहीं की गई ?

दीपक प्रकाश ने कहा कि झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) के पदाधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हजारों दर्शकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का अधिकार उन्हें किसने दिया ? स्टेडियम की क्षमता और भीड़ के अनुमान के बावजूद यदि समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. केवल औपचारिक बयान देकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. उन्होंने राज्य सरकार पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने समय रहते आवश्यक सुरक्षा प्रबंध क्यों नहीं किए ? क्या राज्य सरकार केवल तमाशबीन बनी रही ? यदि लाखों लोगों को आकर्षित करने वाले आयोजन की अनुमति दी गई थी, तो सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन का दायित्व था. इस मामले में सरकार की विफलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.

दीपक प्रकाश ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए तथा JSCA की संपूर्ण प्रबंधन समिति, आयोजन समिति एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए. दीपक प्रकाश ने कहा कि खेल और खिलाड़ियों के नाम पर जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए. झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किसकी लापरवाही के कारण निर्दोष लोग घायल हुए और उनकी जान जोखिम में पड़ी.

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए टिकट अथवा पास आधारित प्रवेश, सभी गेटों का संचालन, पर्याप्त पुलिस बल एवं दंडाधिकारियों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल इमरजेंसी सिस्टम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए. जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है. जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए.

यह भी पढ़ें- शहर के बल्क वेस्ट जनरेटरों के लिए SWM पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य: रांची नगर निगम

 

संबंधित सामग्री

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गांदके गांव में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है.

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त किए जाने के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट हैं.

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है.

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय तक संविदा पर काम करने वाले नौ कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है.

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

झारखंड हाईकोर्ट ने गैर-औपचारिक शिक्षा योजना में काम कर चुके 35 सुपरवाइजरों को झारखंड सरकार की नियमित सेवा में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है.