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रांची/डेस्क: पॉक्सो की विशेष कोर्ट ने मुस्तफा अंसारी को 10 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माने की राशि पीड़िता के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए देने का कोर्ट ने आदेश दिया. मामला साल 2020 में बरियातू थाना क्षेत्र का है. मामले में DNA जांच अहम कड़ी बनी. कोर्ट ने फैसले में SFSL जांच की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना. जांच में पीड़िता के कपड़े से लिए गए प्लाजो के नमूने में वीर्य पाया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, उस नमूने के पुरुष के डीएनए प्रोफाइल का मिलान आरोपी के रक्त के नमूने से हुआ. कोर्ट ने कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य आरोपी और पीड़िता के कपड़े पर मिले वीर्य के बीच जैविक संबंध स्थापित करता है. पीड़िता की 3 जून 2020 को मेडिकल जांच हुई थी. रिपोर्ट में बाहरी शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले थे. लेकिन पेल्विक जांच में लैबिया में सूजन और फोरशेट के हिस्से में छोटा घाव पाया गया था. मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि यौन हमला होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चोट का नहीं मिलना यौन हिंसा नहीं होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है.
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