संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: 'आया राखी का त्योहार लाया खुशियों की बहार', 'रेशम के धागों में बंधा है भाई-बहन का यह पावन प्यार'. सावन की रिमझिम फुहारों में गीत गाता है 'यह मन, मेरी बहना मुस्कुराती रहे' और 'हमेशा महकता रहे हमारे घर का यह आंगन'. बचपन की वो मीठी तकरारें और रूठ कर मान जाने की वो प्यारी आदतें, आज इस रेशमी डोरी के साथ मधुर याद बनकर छलक रही हैं. पूजा की थाली में सजे हैं रोली चंदन और जलते हुए दीये की पावन लौ में चमक रहा है बहन का अटूट विश्वास.
इस शुभ अवसर पर भाई भी मुस्कुराकर यह वचन देता है कि जीवन की हर आंधी और हर मुश्किल में वह हमेशा बनकर रहेगा अपनी बहन की मजबूत ढाल. राहें चाहे कितनी भी कठिन हों और दूरियां चाहे कितनी भी हों, लेकिन दिलों के तार इस रक्षा सूत्र से हमेशा के लिए जुड़े रहते हैं. यह राखी केवल एक साधारण धागा नहीं है, बल्कि यह समर्पण, सुरक्षा और वादों का वह सुंदर गीत है जिसे हर साल नई उम्मीदों के साथ गाया जाता है. ईश्वर से बस यही प्रार्थना है कि हर भाई की कलाई पर उसकी बहन का यह निश्छल प्यार सजता रहे और हर बहन के सिर पर उसके भाई का साया हमेशा के लिए बना रहे. रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर स्नेह और आत्मीयता का यह गीत हर घर-आंगन में खुशियों की गूंज बनकर हमेशा यूं ही महकता रहे.
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