DMFT फंड

चाईबासा में DMFT फंड के पैसे को हेमंत सरकार ने लुटवा दिया: बाबूलाल मरांडी

75.68 प्रतिशत राशि खर्च, परंतु इलाकों की बुनियादी समस्याएं जस की तस, यह आर्थिक अपराध

By : Ark Sahuliyar
चाईबासा में DMFT फंड के पैसे को हेमंत सरकार ने लुटवा दिया: बाबूलाल मरांडी

न्यूज़11 भारत 
पश्चिमी सिंहभूम/डेस्क:
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमएफटी फंड बनाया था, चाईबासा जिले में उस फंड का कोई लाभ खदान प्रभावित इलाकों के लोगों को होता नहीं दिख रहा है. राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में इस फंड की केवल बंदरबांट और लूट हुई है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने तीन दिनों तक इस इलाके का दौरा किया और विस्तारपूर्वक लोगों से जमीनी हकीकत समझने की कोशिश की परंतु जो तस्वीर और जानकारी सामने आई है वह काफी  भयावह एवं पीड़ादायक है. आज झारखंड और कोल्हान के इलाके में जो गरीबी और बेरोजगारी व्याप्त है, इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन सरकार जिम्मेवार है. यहां उनके मंत्री और प्रशासन सहित तमाम लोग जनता की चिंता छोड़ अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए हैं. डीएमएफटी फंड को लेकर राज्य सरकार को श्वेत पत्र जारी करनी चाहिए. बाबूलाल मरांडी चाईबासा के जिला भाजपा कार्यालय में प्रेस मीडिया को सम्बोधित कर रहे थे. 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने तो खदान प्रभावित इलाकों की कभी कोई चिंता ही नहीं की. 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने डीएमएफटी फंड बनाया. इसके पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के कारण खदान इलाकों के संकट से वे भली-भांति परिचित थे. डीएमडी फंड का अध्यक्ष डीसी को बनाया गया. इस फंड से खदान इलाकों में विकास कार्य हो, इस योजना का यह मुख्य उद्देश्य है. लेकिन हमें अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान कहीं भी इस इलाके में विकास दिखाई नहीं दिया. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि चाईबासा जिले में 10 वर्षों में 3742.15 करोड़ रूपया डीएमएफटी फंड में मिला है. आश्चर्यजनक बात यह है कि सरकार द्वारा 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दिया है परंतु प्रभावित इलाकों की बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं. हेमंत सोरेन सरकार ने इस फंड का पैसा यूं ही लूटा दिया है. यह एक प्रकार का आर्थिक अपराध है. 

उन्होंने कहा कि खर्च की गई राशि को पोर्टल में डालना था ताकि इस फंड की पारदर्शिता बनी रहे. आम लोग भी देख सके कि यह राशि उनके हित में या अहित में खर्च की जा रही है. परंतु राज्य सरकार ने खर्च का ब्यौरा पोर्टल में नहीं डाला. बाबूलाल मरांडी ने पत्रकारों से कहा कि आप लोग भी मामले की तहकीकात करिए और डीसी से पूछिए कि खर्च का ब्यौरा पोर्टल में क्यों नहीं डाला गया है. खर्च कहां-कहां हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेवार हैं ?

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देश भर में 434 खदानों की नीलामी हुई है. वहीं झारखंड में मात्र तीन खदान का ही ऑक्शन हुआ है,  वह ऑक्शन भी झारखंड सरकार ने नहीं बल्कि भारत सरकार के द्वारा हुआ है. झारखंड में एक भी खदान का ऑक्शन नहीं किया गया. राज्य सरकार बताए कि इसके लिए कौन जिम्मेवार है ? अगर झारखंड सरकार ऑक्शन करती तो यहां से युवाओं और मजदूरों का पलायन नहीं होता. आज स्थिति यह है कि रोजगार के अभाव में छोटे-छोटे बच्चे तक पलायन करने को मजबूर हैं. अनेक खदानें नीलामी नहीं होने के कारण वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर समाप्त हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि बगल के राज्य उड़ीसा में 45 कोल एवं नन कॉल ब्लॉक की नीलामी हुई है. उसमें अधिकांश आयरन ओर की खदानें हैं. उड़ीसा ने ऑक्शन किया तो उसका फायदा भी उड़ीसा को मिला. 2025-26 में झारखंड को जहां 22000 करोड़ रूपया मिनरल्स  से रॉयल्टी प्राप्त हुआ है वहीं  उड़ीसा सरकार के खजाने में 46000 करोड़ रूपया मिला है. यह ऑक्शन करने का फायदा है. उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज का डिपोजिट 40% है जबकि उड़ीसा में खनिज का डिपोजिट 17% है. सोचिए, जिस राज्य के पास 17% डिपोजिट है वह तेजी से काम कर रहा है और जहां झारखंड में 40% डिपॉजिट है वह पिछड़ रहा है, यह काफी चिंतनीय शर्मनाक स्थिति है. 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वित्त मंत्री ने कहा था कि वह उड़ीसा टीम भेज कर सारी वस्तुस्थिति का जायजा लेंगे. बाबूलाल मरांडी ने सुझाव दिया कि उड़ीसा जाने की क्या जरूरत है, सरकार हमसे पूछे हम बता देंगे कि राजस्व कैसे आएगा. उन्होंने झारखंड सरकार के विदेश दौरे पर भी सवाल उठाया. कहा कि झारखंड सरकार निवेश के नाम पर खूब विदेश का दौरा कर रही है और बड़े-बड़े एमओयू साइन हो रहे हैं परंतु उसका जमीनी फायदा शून्य है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वे तीन दिनों से पश्चिमी सिंहभूम प्रवास पर खदान प्रभावित इलाकों के दौरे पर हैं. इस दौरान खदान एवं औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत को देखा. उन्होंने कहा कि वे बहुत दिनों बाद इस प्रकार का दौरा कर रहे हैं. पूर्व में 1998 के पहले और 1998 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद इस इलाके का दौरा उन्होंने किया है. लगा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ इस इलाके को मिला होगा और परिस्थितियां काफी हद तक बदल गई होंगीं. पार्टी दौरे के  दौरान यह देखकर अत्यंत पीड़ा हुई कि पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, स्कूल आदि जो बुनियादी समस्याएं पहले थी, आज भी उनकी वही स्थिति है. विकास का कोई काम नहीं हुआ है. आज भी खदान इलाके के लोग नदी, नाले, डोभा का पानी पीने को मजबूर हैं. उनको सही इलाज नहीं मिल पा रहा है, विद्यालय भवन जर्जर है, शिक्षक नहीं है, टोला मोहल्ला में सड़कें नहीं होने के कारण  आज भी बीमार होने पर उन्हें खटिया पर टांगकर ले जाना पड़ता है. इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद, प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा आदि भी उपस्थित रहे.

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