संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल क्षेत्र रतनपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इरगु इन दिनों शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता की सबसे बड़ी दास्तां बयां कर रहा है. सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा सूबे में शिक्षा के अधिकार और विद्यालयों के कायाकल्प के चाहे जितने दावे किए जाएं, लेकिन धरातल की हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है.
विद्यालय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां कागजों पर कुल 81 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है, लेकिन उपस्थिति संतोषजनक से कोसों दूर है. जानकारी के अनुसार, सोमवार को जब विद्यालय की पड़ताल की गई तो कक्षा में मात्र 9 बच्चे ही उपस्थित मिले. विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थापित हैं, इसके बावजूद बच्चों की उपस्थिति में सुधार लाने को लेकर कोई ठोस सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ रहा है, बच्चों के स्कूल न आने से अभिभावकों में भी गहरी चिंता और रोष व्याप्त है.
विद्यालय की भौतिक स्थिति बेहद दयनीय है. कक्षाओं की छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और लोहे के सरिए (रॉड) साफ तौर पर बाहर झांक रहे हैं. जर्जर छत और दीवारों की बदहाली किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, विद्यालय का शौचालय भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है जिसमें बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग चुकी हैं. आदिवासी बहुल इस ग्रामीण इलाके के छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर इसी जोखिम भरे माहौल में शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं.
कमरे के भीतर लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा मध्याह्न भोजन
बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए चलाई जाने वाली महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना भी यहां व्यवस्था की लाचारी का शिकार है. उचित रसोई घर के अभाव में स्कूल के अंदर ही जमीन पर ईंटें जोड़कर बनाए गए लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाया जा रहा है. चूल्हे से उठता धुआँ और कुव्यवस्था इस बात की गवाही दे रही है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुविधाओं के प्रति कितनी लापरवाही बरती जा रही है.
स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण इस विद्यालय की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. दो शिक्षकों की नियुक्ति के बावजूद स्कूल में शैक्षणिक माहौल का नदारद रहना और बच्चों की उपस्थिति का इतना कम होना शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधीक्षक से मांग की है कि इस सुदूरवर्ती विद्यालय की अविलंब सुध ली जाए, जर्जर भवन का जीर्णोद्धार कराया जाए तथा शिक्षकों की जवाबदेही तय करते हुए बच्चों की उपस्थिति और पठन-पाठन व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने से बच सके.
मामले की जानकारी होने के बाद प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी परमेश्वर साहू ने तत्काल मामले में संज्ञान लेते हुए प्रधानाध्यापक विनोद पासवान को कई शख्त निर्देश दिए हैं ,उन्होंने कहा की विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम से कम 75% सुनिश्चित होनी चाहिए ऐसा पदाधिकारीयों का निर्देश है ,उन्होंने कहा कि बच्चे विद्यालय में नहीं आ रहे हैं यह यह सबसे पहले शिक्षकों की जिम्मेवारी है, उन्होंने पिछले दिनों की उपस्थिति रिकॉर्ड जांच कर एवं इस संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करने की बातें कही है.
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