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रांची/डेस्क: झारखंड में अब कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ उससे बिजली उत्पादन की दिशा में भी पहल तेज करने की तैयारी है. गुरुवार को राजधानी रांची के चाणक्य बीएनआर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियमों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन किया. इस दौरान विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कई अहम बातें कहीं.
नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम को लागू करने की रणनीति तैयार
रांची के चाणक्य बीएनआर में आयोजित State Level Workshop on Solid Waste Management Rules and Convergent Actions में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, विभागीय सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. कार्यशाला का उद्देश्य केंद्र सरकार के नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को राज्य में मिशन मोड में लागू करने की रणनीति तैयार करना रहा.
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए केंद्र सरकार नए नियम लेकर आई है और झारखंड इसे मिशन मोड में लागू करेगा. उन्होंने कहा कि ओडीएफ एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन वर्ष 2014 और 2026 के लिए एक जैसी वित्तीय व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है. इस मुद्दे को उन्होंने दिल्ली में हुई बैठक में भी उठाया था हालांकि अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है.
कचरे से बिजली उत्पादन की योजना
मंत्री ने बताया कि राज्य में 14 लाख की लागत से सामुदायिक शौचालय बनाने का काम किया जा रहा है वहीं, कचरे से बिजली उत्पादन की योजना पर भी काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे. साथ ही उन्होंने अधिकारियों से दायित्व और जवाबदेही के साथ काम करने का आह्वान किया. साफ-सफाई के साथ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में झारखंड की यह पहल कितनी सफल होती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. फिलहाल राज्य सरकार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को नई सोच और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी है.
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