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सिमडेगा/डेस्क: सिमडेगा सिर्फ दक्षिण छोटानागपुर के अंतिम छोर पर बसे एक जिला का नाम हीं नहीं, ब्लकि सिमडेगा वह है जिसके नाम में ही बेटियों के ऊर्जावान और सशक्त पहचान उजागर होती है. यहां की माटी हॉकी खेल के लिए पूरे विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान रखती है. सिमडेगा की माटी वही है, लेकिन इस माटी से निकलने वाले सपनों की उड़ान लगातार बड़ी होती जा रही है. कभी हॉकी की नर्सरी के रूप में पहचान बनाने वाला सिमडेगा अब अपनी बेटियों की प्रतिभा से देश के बड़े मंचों पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है. इसी बदलते सिमडेगा की कहानी को देश के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति' के मंच तक पहुंचाया है सिमडेगा की बेटी रेशमा लकड़ा ने.
सामाजिक वानिकी विभाग में प्रधान वनकर्मी के रूप में कार्यरत रेशमा लकड़ा ने केबीसी के 31वें एपिसोड में हिस्सा लिया. मुंबई में शूट हुए कार्यक्रम में वह हॉट सीट तक पहुंचने से मामूली अंतर से चूक गईं, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर उनकी मौजूदगी ने सिमडेगा और झारखंड को गौरवान्वित किया. रेशमा ने प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अपने जिले की पहचान को भी पूरे देश के सामने रखा.
महानायक अमिताभ बच्चन के सामने रेशमा ने जिस आत्मविश्वास से अपनी बात रखी, उसने सभी का ध्यान खींचा. उनका संवाद “सिमडेगा की मैं छोरी, हॉट सीट में बैठकर सब पर पड़ूंगी भारी” उनके आत्मविश्वास और अपनी मिट्टी से जुड़ाव को दर्शाता है. उनके इस अंदाज पर स्टूडियो में तालियां भी गूंजीं.
केबीसी के मंच पर रेशमा ने सिमडेगा को ‘हॉकी की नर्सरी’ बताते हुए जिले की खेल प्रतिभाओं का उल्लेख किया. उन्होंने भारतीय महिला हॉकी की स्टार खिलाड़ी सलीमा टेटे का नाम लेकर बताया कि सिमडेगा की माटी ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं दी हैं.
रेशमा की यह उपलब्धि केवल एक टीवी शो में शामिल होने तक सीमित नहीं है. यह उस सिमडेगा की बदलती तस्वीर है, जहां बेटियां अब खेल के साथ शिक्षा, नौकरी, कला और देश के बड़े मंचों पर भी अपनी पहचान बना रही हैं. छोटे शहर और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली बेटियों के लिए रेशमा की यात्रा प्रेरणा का संदेश है.
हॉट सीट तक पहुंचने से भले ही रेशमा चूक गईं, लेकिन उन्होंने सिमडेगा का नाम करोड़ों दर्शकों तक पहुंचाकर एक अलग पहचान जरूर बनाई. उनकी यह उपलब्धि जिले की युवा पीढ़ी को यह भरोसा दिलाती है कि प्रतिभा किसी शहर की मोहताज नहीं होती. अवसर मिले तो सिमडेगा की माटी से निकली आवाज भी देश-दुनिया तक पहुंच सकती है.
रेशमा लकड़ा की यह कहानी बदलते सिमडेगा की उसी नई तस्वीर को सामने रखती है. जो बताती है कि सिमडेगा की माटी प्रतिभाओं का खजाना है.
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