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सिमडेगा/डेस्क: मैदान पर जब कप्तान सलीमा टेटे ने भारतीय हॉकी टीम के साथ एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक अपने नाम किया, तब देशभर में तिरंगा शान से लहराया. लेकिन इस ऐतिहासिक कामयाबी की सबसे गहरी खुशी सिमडेगा के उस पिता के दिल में थी, जिसने अपनी बेटी को संघर्षों के बीच आगे बढ़ते देखा था. स्वर्ण पदक जीतकर घर लौटी बेटी सलीमा टेटे को पिता सुलक्षण टेटे ने जब गले लगाया तो वर्षों से संजोया गर्व और खुशी उनकी आंखों से छलक पड़ा.
पिता-बेटी का यह मिलन बेहद भावुक कर देने वाला था. सामने देश की चैंपियन बेटी थी और उसे अपने सीने से लगाए पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे. सलीमा के हाथों में देश की जीत का गौरव था, जबकि पिता के चेहरे पर अपनी बेटी की उपलब्धि का गर्व साफ नजर आ रहा था.
अपने दम पर टीम में बनायीं अलग पहचान
सलीमा के लिए यह सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि सिमडेगा की मिट्टी से निकले सपने की ऐतिहासिक उड़ान है. गांव के मैदानों से हॉकी की शुरुआत करने वाली सलीमा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और अदम्य हौसले के दम पर भारतीय महिला हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाई है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे सिमडेगा को गौरवान्वित किया है.
बेटी को गले लगाते समय सुलक्षण टेटे की आंखों में उमड़ते आंसू मानो उन तमाम दिनों की कहानी कह रहे थे, जब बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए परिवार ने संघर्ष किया. आज वही बेटी दुनिया के बड़े खेल मंच पर भारत के लिए स्वर्ण जीतकर लौटी है.
सिमडेगा में ख़ुशी की लहर
सलीमा की सफलता पर सिमडेगा में भी खुशी की लहर है. खेल की नगरी के रूप में पहचान बना चुका यह जिला अपनी इस बेटी की उपलब्धि पर गर्व कर रहा है. पिता की बाहों में सिमटी चैंपियन सलीमा की तस्वीर ने यह संदेश भी दिया कि छोटे से गांव और साधारण परिवार से निकला सपना भी मेहनत और हौसले के दम पर देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बदल सकता है.
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